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यूजीसी नेट जनवरी 2018 हिंदी प्रश्नपत्र- 2 | nta ugc/net jan 2018 hindi question paper- II

एनटीए (NTA) द्वारा आयोजित यूजीसी नेट (ugc net) परीक्षा हिंदी 2nd, 20 (hindi- 20) का प्रश्नपत्र (paper) यहाँ दिया जा रहा है। यह परीक्षा जनवरी 2018 में आयोजित हुई थी। प्रश्नों का उत्तर जल्द ही उपलब्ध कराया जायेगा। इस question paper को आप निचे दिए गए लिंक की सहायता से डाउनलोड भी कर सकते हैं।

निर्देश: इस प्रश्नपत्र में सौ (100) बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के दो (2) अंक हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

 

ugc-net-jan-2018-hindi-question-paper-2


1. आभ्यंतर प्रयत्न के अनुसार वर्णों के भेद हैं:


(1) तीन     (2) चार      (3) दो       (4) पाँच

 

2. निम्नलिखित में से पश्चिमी हिंदी की बोली नहीं है:

(1) ब्रजभाषा (2) कन्नौजी

(3) बुंदेली    (4) मगही

 

3. सिद्ध-साहित्य के अन्तर्गत चौरासी सिद्धों की वे साहित्यिक रचनाएं आती हैं जो:

(1) प्राकृत में लिखी गई हैं

(2) पैशाची अपभ्रंश में लिखी गई हैं

(3) पूर्ववर्ती अपभ्रंश में लिखी गई हैं

(4) तत्कालीन लोक-भाषा हिंदी में लिखी गई हैं

 

4. कबीर के ‘निर्गुण पंथ’ का आधार भारतीय वेदांत और ‘सूफियों का प्रेम तत्व’ है। यह विचार किसका है?

(1) रामचंद्र शुक्ल          (2) राहुल सांकृत्यायन

(3) हजारीप्रसाद द्विवेदी     (4) गोविन्द त्रिगुणायत

 

5. ‘केवल प्रेम लक्षणा भक्ति” का आधार ग्रहण करने के कारण कृष्ण भक्ति शाखा में अश्लील विलासिता की प्रवृत्ति जाग्रत हुई।’- यह विचार किसका है?

(1) जार्ज ग्रियर्सन    (2) मिश्र बंधु

(3) रामचंद्र शुक्ल    (4) रामकुमार वर्मा

 

6. प्राणचंद चौहान का संबंध भक्ति की किस शाखा से है?

(1) रामभक्ति शाखा (2) कृष्णभक्ति शाखा

(3) स्वसुखी शाखा   (4) ज्ञानमार्गी शाखा

 

7. ‘भँवर गीत’ किसकी रचना है?

(1) सूरदास   (2) नन्ददास

(3) चतुर्भुजदास      (4) कृष्णदास

 

8. राजनीतिक रूप से रीतिकाल मुग़लों के शासन के वैभव के:

(1) चरमोत्कर्ष का युग है

(2) उत्थान का युग है

(3) विस्तार का युग है

(4) चरमोत्कर्ष के बाद उत्तरोत्तर छहास और पतन का युग है

 

9. कवि ठाकुर ने किस राजा के कटु वचन कहने पर म्यान से तलवार निकाल ली और कहा:

सेवक सिपाही हम उन रजपूतन के,

दान जुद्ध जुरिबे में नेकु जे न मुरके।

नीत देनवारे हैं मही के महीपालन को,

हिए के विरुद्ध हैं, सनेही साँचे उर के।

ठाकुर कहत हम बैरी बेवकूफन के,

जालिम दमाद हैं अदानियाँ ससुर के।

चोजिन के चोजी महा, मौजिन के महाराज

हम कविराज हैं, पै चाकर चतुर के।

 

(1) अनूप गिरि उर्फ हिम्मत बहादुर

(2) जगत सिंह

(3) राजा पारीकछत

(4) महाराज उदितनारायण सिंह

 

10. निम्नलिखित में से कौन-सी रचना ठाकुर जगन्मोहन सिंह की नहीं है?

(1) प्रेम संपत्तिकला   (2) श्यामालता

(3) श्यामा सरोजिनी (4) प्रेम प्रलाप

 

11. ‘बगियान बसंत बसेरो कियो, बसिए, तेहि त्यागि तपाइए ना।

दिन काम-कुतूहल के जो बने, तिन बीच बियोग बुलाइए ना॥’

उपर्युक्त काव्य पंक्तियों के रचनाकार हैं:

(1) प्रतापनारायण मिश्र

(2) बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’

(3) ठाकुर जगन्मोहन सिंह

(4) भारतेन्दु हरिश्चंद्र

 

12. ‘आज रात इससे परदेशी चल कीजे विश्राम यहीं।

जो कुछ वस्तु कुटी में मेरे करो ग्रहण, संकोच नहीं ॥

प्रस्तुत काव्य पंक्तियों के रचनाकार हैं:

(1) अंबिकादत्त व्यास (2) श्रीधर पाठक

(3) रामनरेश त्रिपाठी (4) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

 

13. ‘आवारा मसीहा’ किसके जीवन पर आधारित है?

(1) शरतचन्द्र       (2) बंकिमचन्द्र

(3) रवीन्द्रनाथ टैगोर (4) विभूतिभूषण बन्दोपाध्याय

 

14. ‘बर्बरता की पहली सीढ़ी से सभ्यता की अंतिम सीढ़ी तक युद्ध मनुष्य जाति का साथ देता आया है।’ यह कथन किस निबंध से उद्धृत है?

(1) उत्साह

(2) युद्ध और नारी

(3) जीवन का व्यवसाय

(4) मज़दूरी और प्रेम

 

15. निम्नलिखित में से किस कहानी में अति व्यस्त कामकाजी आदमी की असंतुष्ट पत्नी को विषयवस्तु बनाया गया है?

(1) ग्रामोफोन का रिकार्ड

(2) नीलम देश की राजकन्या

(3) बाहुबली

(4) दृष्टिदोष

 

16. निम्नलिखित में से किस उपन्यास में ‘रईस साहूकार मदनमोहन के अंग्रेजी सभ्यता की नकल और अपव्यय की कथा’ है ?

(1) नूतन ब्रह्मचारी (2) परीक्षा गुरु

(3) आदर्श दम्पती   (4) प्रणयिनी परिणय

 

17. पर्णदत्त जयशंकर प्रसाद के किस नाटक का पात्र है?

(1) कल्याणी परिणय (2) राज्यश्री

(3) स्कन्दगुप्त      (4) अजातशत्रु

 

18. ‘हिंदी साहित्य: बीसवीं शताब्दी’- आलोचना-ग्रंथ के लेखक हैं:

(1) शांतिप्रिय द्विवेदी (2) नन्ददुलारे वाजपेयी

(3) नेमिचन्द्र जैन    (4) शिवदानसिंह चौहान

 

19. आचार्य भरत के रससूत्र के व्याख्याता शंकुक के सिद्धान्त का नाम है:

(1) अनुमितिवाद     (2) भोगवाद

(3) अभिव्यक्तिवाद   (4) आरोपवाद

 

20. निम्नलिखित में से कौन-सी पुस्तक आई.ए. रिचर्ड्स द्वारा लिखित नहीं है?

(1) प्रिंसिपल्स ऑफ लिटरेरी क्रिटिसिज़्म

(2) नोट्स टुवर्ड्स द डेफिनिशन ऑफ कल्चर

(3) प्रैक्टिकल क्रिटिसिज़्म

(4) कॉलरिज ऑन इमैजिनेशन

 

21. ‘घोर अँधारे चंदमणि जिमि उज्जोअ करेइ।

परम महासुह एखु कणे दुरिअ अशेष हरेइ॥’

उपर्युक्त दोहे में ‘महासुह’ का संबंध किस-किससे है?

(a) महासुख ‘महासुह’ का तत्सम रूप है।

(b) महासुख वज्रयानियों का पारिभाषिक शब्द है।

(c) प्रज्ञा और योग से महासुख की दशा संभव है।

(d) महासुख निर्वाण-प्राप्ति में बाधक है।

कोड:

(1) (a) और (d) सही

(2) (b) और (d) सही

(3) (a), (b) और (c) सही

(4) (a), (b) और (d) सही

 

22. ‘गोरख जगायो जोग,

भगति भगायो लोग।’

इन पंक्तियों में तुलसी का अभिप्राय है:

(a) नाथ पंथ का हठयोग मार्ग हृदयपक्ष शून्य है।

(b) जनता हठयोग को पसंद करती थी।

(c) योगियों की रहस्यभरी बानियों से जनता की भक्ति-भावना दब गई थी।

(d) जनता भक्त मार्ग से विमुख हो गई थी।

कोड:

(1) (a), (b) और (d) सही

(2) (b), (c) और (d) सही

(3) (a) और (d) सही

(4) (a) और (c) सही

 

23. ‘ना नगरी काया बिधि कीन्हा। लेइ खोजा पावा, तेइ चीन्हा।

पै सुठि अगम पंथ बड़ बाँका। तस मारग जस सुई क नाका।

बाँक चढ़ाव, सात खंड ऊँचा। चारि बसेरे जाइ पहुँचा।’

शुक्लजी के अनुसार उक्त पंक्तियों में प्रयुक्त ‘चारि बसेरे’ से अभिप्राय है:

(a) चार धर्मशालाएं।

(b) प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि नामक योग के अंग।

(c) शरीअत, तरीकत, मारिफत और हकीकत नामक चार सोपान।

(d) धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष नामक पुरुषार्थ।

कोड

(1) (a) और (d) सही      (2) (b) और (c) सही

(3) (b) और (d) सही      (4) (c) और (d) सही

 

24. जाके कुटुंब सब ढोर ढोवंत

फिरहिं अज हूँ बानारसी आसपासा।

आचार सहित बिप्र करहिं डंडउति

तिन तने रविदास दासानुदासा॥

इन काव्य पंक्तियों में किन भावों की अभिव्यंजना हुई है?

(a) लोक-व्यवहार    (b) वर्ण-व्यवस्था

(c) विनय          (d) गर्वोक्ति

कोड:

(1) (a) और (d) सही     

(2) (a) (b) और (c) सही

(3) (b), (c) और (d) सही

(4) (b) और (d) सही

 

25. झूठो है, झूठो है, झूठो सदा जगु, संत कहंत जे अंतु लहा है।

ताको सहै सठ! संकट कोटिक, काढ़त दंत, करंत हहा है।

जानपनी को गुमान बड़ो, तुलसी के बिचार गँवार महा है।

जानकी जीवनु जान न जान्यो तौ जान कहावत जान्यो कहा है॥

तीसरी पंक्ति में तुलसीदास कहना चाहते हैं कि:

(a) उन्हें अपने ज्ञानीपने का बहुत अभिमान है।

(b) वे स्वयं महा गँवार हैं।

(c) संसार को झूठा कहने वाले महा गाँवार हैं।

(d) जानकी के जीवन से अनभिज्ञ लोग गँवार हैं।

कोड:

(1) (c) और (d) सही      (2) (a) और (b) सही

(3) (a) और (c) सही      (4) (a), (c) और (d) सही

 

26. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों के आशय हैं:

उर में माखन चोर गड़े।

अब कैसहु निकसत नहिं, ऊधो! तिरछे हवै जो अड़े।

(a) गोपी के दिल में कृष्ण बस गए हैं।

(b) वह उन्हें दिल से निकालना चाहती है, लेकिन निकलते ही नहीं।

(c) वह उन्हें दिल में बसाए रखना चाहती है।

(d) कृष्ण को दिल से निकालना गोपी के लिए असंभव है।

कोड:

(1) (a), (b) और (d) सही

(2) (b) और (d) सही

(3) (b) और (c) सही

(4) (a) (c) और (d) सही

 

27. रीतिमुक्त कविता की विशेषताएं हैं:

(a) यह आन्तरिक अनुभूतियों का काव्य है।

(b) यह मूलत: आत्मप्रधान और व्यक्तिगत है।

(c) यह सभी प्रकार की रूढ़ियों से मुक्त है।

(d) अभिव्यंजना में यह अभिधामूलक है।

कोड:

(7) (a), (b) और (c) सही

(2) (a), (b) और (d) सही

(3) (b), (c) और (d) सही

(4) (b) और (d) सही

 

28. किंसुक-पुंज से फूलि रहे सु लगी उर दौ जु वियोग तिहारे।

मातो फिरै, न घिरे अबलानि पै, जान मनोज यों डारत मारे।

हवे अभिलाषनि पात निपात कढ़े हिय-सूल उसांसनि डारे।

है पतझार बसंत दुहूँ घनआनंद एकहि बार हमारे॥

इन पंक्तियों में भावाभिव्यंजना के कौन-कौन रूप व्यक्त हुए हैं?

(a) उक्त वैचित्र्य    (b) उक्ति चमत्कार

(c) उक्त विपर्यय    (d) उक्ति सादृश्यता

कोड:

(1) (a), (b) और (d) सही

(2) (a), (b) और (c) सही

(3) (b), (c) और (d) सही

(4) (c) और (d) सही

 

29. मीरा बाई के पदों में मुख्य है:

(a) अपूर्व भाव विहवलता

(b) रहस्यानुभूति

(c) आत्म-समर्पण

(d) भगवद्विरह की पीड़ा की उत्कट अभिव्यक्ति

कोड ;

(1) (a), (b) और (c) सही

(2) (a), (c) और (d) सही

(3) (b) और (c) सही

(4) (b), (c) और (d) सही

 

30. ‘खड़ी बोली’ शब्द का प्रयोग

(a) साहित्यिक हिंदी खड़ी बोली के अर्थ में होता है।

(b) दिल्ली-मेरठ के आस-पास की लोक-बोली के अर्थ में होता है।

(c) खड़ी बोली का उद्धव शौरसेनी अपभ्रंश के उत्तरी रूप से हुआ है।

(d) खड़ी बोली में लोकसाहित्य बिल्कुल नहीं है।

कोड:

(1) (a) और (d) सही

(2) (c) और (d) सही

(3) (a), (b) और (c) सही

(4) (b) और (d) सही

 

31. निम्नलिखित विकल्पों में से किसका संबंध रामधारी सिंह ‘दिनकर’ से है?

(a) कामाध्यात्म की समस्या

(b) पौराणिक प्रसंग में भारत-चीन युद्ध का युगीन सन्दर्भ

(c) युद्ध-दर्शन

(d) सुधारवाद

कोड:

(1) (c) और (d) सही

(2) (a), (b) और (c) सही

(3) (b) और (d) सही

(4) (b), (c) और (d) सही

 

32. निम्नलिखित में से किनका संबंध सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ से है?

(a) आत्मचेतस

(b) विचार कविता

(c) बावरा अहेरी

(d) जापानी लोक कथा का रचनात्मक उपयोग

कोड:

(1) (a) और (b) सही

(2) (b) और (c) सही

(3) (b), (c) और (d) सही

(4) (a), (c) और (d) सही

 

33. निम्नलिखित में से कौन-कौन प्रेमचंद की कहानियों के पात्र हैं?

(a) लहना सिंह      (b) पंडित बुद्धिराम

(c) अमीना         (d) सुनन्‍दा

कोड:

(1) (a), (b), (c) सही

(2) (b) और (c) सही

(3) (b) (c), (d) सही

(4) (d), (c) और (a) सही

 

34. निम्नलिखित में से प्रेमचंद के उपन्यासों के पात्र हैं:

(a) कृष्णचंद्र        (b) सोफिया

(c) हरिप्रसन्न       (d) गजाधर

कोड:

(1) (a), (b), (c) सही

(2) (b) (c), (d) सही

(3) (a) (b) और (d) सही

(4) (a), (c) और (d) सही

 

35. निम्नलिखित में से हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निबंध-संग्रह हैं:

(a) आलोक पर्व

(b) माटी हो गई सोना

(c) विचार और वितर्क

(d) कुछ उथले कुछ गहरे

कोड:

(1) (a) और (c) सही

(2) (a) (b), (c) सही

(3) (c) और (d) सही

(4) (a) और (d) सही

 

36. निम्नलिखित में से कौन-सी रचनाएं दलित आत्मकथाएं हैं?

(a) अपने अपने पिंजरे

(b) मुड़ मुड़ कर देखता हूँ

(c) मेरी पत्नी और भेड़िया

(d) गर्दिश के दिन

कोड:

(1) (b) और (c) सही

(2) (a) और (c) सही

(3) (a), (b) और (c) सही

(4) (c), (d) और (a) सही

 

37. निम्नलिखित में से किन लेखकों का संबंध यथार्थवाद से है?

(a) मादाम बावेरी (Madame Bavary)

(b) जॉन लॉक (John Lock)

(c) सैमुअल पी. हटिंगटन (Samuel P. Hatington))

(d) क्‍लॉड लेवी-स्त्रॉस (Claude Levi-Strauss)

कोड:

(4) (a) और (b) सही

(2) (b) और (d) सही

(3) (c) और (d) सही

(4) (b) और (c) सही

 

38. निम्नलिखित में से कौन-से नाटक प्रेमचंद द्वारा रचित हैं?

(a) डिक्टेटर       (b) संग्राम

(c) बड़े खिलाड़ी     (d) प्रेम की वेदी

कोड:

(1) (b) और (d) सही

(2) (a) और (c) सही

(3) (b) और (c) सही

(4) (a) और (d) सही

 

39. साधारणीकरण के विषय में कौन-से कथन सही हैं?

(४) साधारणीकरण रसास्वाद के बाद की प्रक्रिया है।

(0) साधारणीकरण आलम्बनत्व धर्म का होता है।

(0) साधारणीकरण के लिए भोजकत्व व्यापार अनिवार्य है।

(५) साधारणीकरण के बिना भी रसानुभूति संभव है।

कोड:

(1) (a) और (b) सही

(2) (a) और (c) सही

(3) (b) और (c) सही

(4) (c) और (d) सही

 

40. “नीलोत्पल के बीच समाए मोती से आँसू के बूँद” उक्त काव्यांश के लिए कौन से कथन सही हैं?

(a) इसमें अलंकार ध्वनि है।

(b) यह रस ध्वनि का उदाहरण है।

(c) इसमें अत्यंत तिरस्कृत वाच्य ध्वनि है।

(d) यह लक्षण लक्षणा पर आधारित है।

कोड:

(1) (a) और (c) सही

(2) (c) और (d) सही

(3) (b) और (c) सही

(4) (a) और (d) सही

 

41. रचनाकाल की दृष्टि से निम्नलिखित सूफी रचनाओं का सही अनुक्रम है:

(1) चित्रावली, मृगावती, चांदायन, अनुराग बाँसुरी

(2) मृगावती, चित्रावली, चांदायन, अनुराग बाँसुरी

(3) चांदायन, मृगावती, अनुराग बाँसुरी, चित्रावली

(4) चांदायन, मृगावती, चित्रावली, अनुराग बाँसुरी

 

42. जन्म-काल के आधार पर निम्नलिखित संत कवियों का सही अनुक्रम है:

(1) दादू, मलूकदास, गुरु नानक, सुन्ददास

(2) गुरु नानक, दादू, मलूकदास, सुन्दरदास

(3) मलूकदास, दादू, सुन्दरदास, गुरुनानक

(4) गुरु नानक, सुन्दरदास, दादू, मलूकदास

 

43. जन्मकाल के आधार पर निम्नलिखित रीतिग्रंथकारों का सही अनुक्रम है:

(1) सूरति मिश्र, देव, भूषण, जसवंत सिंह

(2) भूषण, जसवंत सिंह, देव, सूरति मिश्र

(3) भूषण, देव, सूरति मिश्र, जसवंत सिंह

(4) देव, सूरति मिश्र, भूषण, जसवंत सिंह

 

44. जन्मकाल के अनुसार निम्नलिखित कवियों का सही अनुक्रम है:

(1) श्रीधर पाठक, अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’, रामनरेश त्रिपाठी

(2) गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’, अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, श्रीधर पाठक, रामनरेश त्रिपाठी

(3) रामनरेश त्रिपाठी, श्रीधर पाठक, गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’, अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

(4) श्रीधर पाठक, रामनरेश त्रिपाठी, अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’

 

45. प्रकाशन-काल के अनुसार निम्नलिखित रचनाओं का सही अनुक्रम है:

(1) उर्वशी, कनुप्रिया, कामायनी, यशोधरा

(2) यशोधरा, कामायनी, कनुप्रिया, उर्वशी

(3) यशोधरा, उर्वशी, कामायनी, कनुप्रिया

(4) कामायनी, यशोधरा, कनुप्रिया, उर्वशी

 

46. प्रकाशन-काल की दृष्टि से हरिवंश राय बच्चन की रचनाओं का सही अनुक्रम है:

(1) निशा निमंत्रण, प्रणय पत्रिका, जाल समेटा, मिलन यामिनी

(2) प्रणय पत्रिका, निशा निमंत्रण, मिलन यामिनी, जाल समेटा

(3) मिलन यामिनी, प्रणय पत्रिका, निशा निमंत्रण, जाल समेटा

(4) निशा निमंत्रण, मिलन यामिनी, प्रणय पत्रिका, जाल समेटा

 

47. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित कविताओं का सही अनुक्रम है:

(1) मधुबाला, प्रलय की छाया, पटकथा, असाध्य वीणा

(2) पटकथा, असाध्य वीणा, मधुबाला, प्रलय की छाया

(3) प्रलय की छाया, मधुबाला, असाध्य वीणा, पटकथा

(4) प्रलय की छाया, पटकथा, मधुबाला, असाध्य वीणा

 

48. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित उपन्यासों का सही अनुक्रम है:

(1) दिव्या, जहाज का पंछी, अमृत और विष, पहला पड़ाव

(2) जहाज का पंछी, अमृत और विष, पहला पड़ाव, दिव्या

(3) अमृत और विष, पहला पड़ाव, दिव्या, जहाज का पंछी

(4) पहला पड़ाव, दिव्या, जहाज का पंछी, अमृत और विष

 

49. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित कहानियों का सही अनुक्रम है:

(1) पर्रिंदे, राजा निरबंसिया, उसने कहा था, एक टोकरी भर मिट्टी

(2) राजा निरबंसिया, उसने कहा था, परिंदे, एक टोकरी भर मिट्टी

(3) उसने कहा था, एक टोकरी भर मिट्टी, राजा निरबंसिया, परिंदे

(4) एक टोकरी भर मिट्टी, उसने कहा था, राजा निरबंसिया, पर्रिंदे

 

50. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित निबन्ध-संग्रहों का सही अनुक्रम है:

(1) कला का जोखिम, आस्था और सौन्दर्य, श्रृंखला की कड़ियां, अशोक के फूल

(2) अशोक के फूल, श्रृंखला की कड़ियां, आस्था और सौन्दर्य, कला का जोखिम

(3) श्रृंखला की कड़ियां, अशोक के फूल, आस्था और सौन्दर्य, कला का जोखिम

(4) आस्था और सौन्दर्य, कला का जोखिम, अशोक के फूल, श्रृंखला की कड़ियां

 

54. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित जीवनीपरक ग्रंथों का सही अनुक्रम है:

(1) व्योमकेश दरवेश, कलम का मज़दूर, कलम का सिपाही, आवारा मसीहा

(2) आवारा मसीहा, व्योमकेश दरवेश, कलम का मज़दूर, कलम का सिपाही

(3) कलम का मज़दूर, आवारा मसीहा, व्योमकेश दरवेश, कलम का सिपाही

(4) कलम का सिपाही, कलम का मज़दूर, आवारा मसीहा, व्योमकेश दरवेश

 

52. प्रकाशन वर्ष के अनुसार सुरेन्द्र वर्मा के नाटकों का सही अनुक्रम है:

(1) सेतुबंध, एक दूनी एक, आठवाँ सर्ग, रति का कंगन

(2) आवठवाँ सर्ग, सेतुबंध, रति का कंगन, एक दूनी एक

(3) सेतुबंध, आठवाँ सर्ग, एक दूनी एक, रति का कंगन

(4) आठवाँ सर्ग, सेतुबंध, एक दूनी एक, रति का कंगन

 

53. प्रकाशन वर्ष के आधार पर निम्नलिखित आलोचनात्मक कृतियों का सही अनुक्रम है:

(1) कवि सुमित्रानंदन पंत, हिंदी साहित्य का आदिकाल, मिथक और साहित्य, भारतीय सौन्दर्ययोध और तुलसीदास

(2) हिंदी साहित्य का आदिकाल, कवि सुमित्रानंदन पंत, मिथक और साहित्य, भारतीय सौन्दर्ययोध और तुलसीदास

(3) मिथक और साहित्य, कवि सुमित्रानंदन पंत, भारतीय सौन्दर्ययोध और तुलसीदास, हिंदी साहित्य का आदिकाल

(4) भारतीय सौन्दर्यबोध और तुलसीदास, मिथक और साहित्य, हिंदी साहित्य का आदिकाल, कवि सुमित्रानंदन पंत

 

54. प्रकाशन वर्ष की दृष्टि से आचार्य नंददुलारे वाजपेयी की आलोचनात्मक कृतियों का सही अनुक्रम है:

(1) नयी कविता, जयशंकर प्रसाद, कवि निराला, आधुनिक साहित्य

(2) जयशंकर प्रसाद, आधुनिक साहित्य, कवि निराला, नयी कविता

(3) आधुनिक साहित्य, कवि निराला, जयशंकर प्रसाद, नयी कविता

(4) कवि निराला, आधुनिक साहित्य, नयी कविता, जयशंकर प्रसाद

 

55. कालक्रम की दृष्टि से निम्नलिखित आचार्यो का सही अनुक्रम है:

(1) वामन, कुन्तक, मम्मट, विश्वनाथ

(2) विश्वनाथ, कुन्तक, मम्मट, वामन

(3) कुन्तक, विश्वनाथ, वामन, मम्मट

(4) मम्मट, वामन, कुन्तक, विश्वनाथ

 

निर्देश: प्रश्न संख्या 56 से 75 तक के प्रश्नों में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) (A) है और दूसरा तर्क (Reason) (R) है। कोड में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए ।

 

56. स्थापना (Assertion) (A): जिस प्रकार हमारी आँखों के सामने आए हुए कुछ रूप व्यापार हमें रसात्मक भावों में मग्न करते हैं उसी प्रकार भूतकाल में प्रत्यक्ष की हुई कुछ परोक्ष वस्तुओं का वास्तविक स्मरण भी कभी-कभी रसात्मक होता है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि तब हमारी मनोवृत्ति स्वार्थ या शरीर यात्रा के रूखे विधानों से हटकर शुद्ध भावक्षेत्र में स्थित हो जाती है।

कोड:

(4) (A) सही (R) सही      (2) (A) सही (R) गलत

(3) (A) गलत (R) सही     (4) (A) गलत (R) गलत

 

57. स्थापना (Assertion) (A): साहित्य का इतिहास वस्तुतः मनुष्य-जीवन के अखंड प्रवाह का इतिहास है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि मनुष्य ही साहित्य का अन्तिम लक्ष्य है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) सही (R) सही

(3) (A) गलत (R) सही     (4) (A) गलत (R) गलत

 

58. स्थापना (Assertion) (A): भूमंडलीकरण विश्व की पूँजीवादी व्यवस्था है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि इसमें पूरा विश्व एक बाज़ार है और व्यक्ति उपभोक्ता।

कोड:

(1) (A) गलत (R) सही     (2) (A) सही (R) गलत

(3) (A) सही (R) सही      (4) (A) गलत (R) गलत

 

59: स्थापना (Assertion) (A): दलित साहित्य का वैचारिक आधार मार्क्सवाद है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि इसमें वर्ग-संघर्ष की हिमायत की गई है।

कोड:

(1) (A) सही (R) सही      (2) (A) गलत (R) गलत

(3) (A) गलत (R) सही     (4) (A) सही (R) गलत

 

60. स्थापना (Assertion) (A): अस्तित्ववाद सामाजिक कल्याण और सह अस्तित्व का दर्शन है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि यह व्यक्ति की स्वतन्त्रता और चयन की आजादी का पक्षधर है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) सही

(3) (A) सही (R) सही      (4) (A) गलत (R) गलत

 

61. स्थापना (Assertion) (A): वासना या संस्कार वंशानुक्रम से चली आती हुई दीर्घ भाव परम्परा का मनुष्य जाति की अन्त: प्रकृति में निहित संचय नहीं है।

तर्क (Reason) (R): इसी कारण भारतीय आचार्यों की यह मान्यता पश्चिम की मनोविश्लेषणवादी सामूहिक अवचेतन की अवधारणा से पुष्ट है।

कोड:

(1) (A) सही (R) सही      (2) (A) सही (R) गलत

(3) (A) गलत (R) गलत    (4) (A) गलत (R) सही

 

62. स्थापना (Assertion) (A): किसी काव्य का श्रोता या पाठक जिन विषयों को मन में लाकर रति, करुणा, क्रोध, उत्साह इत्यादि भावों तथा सौन्दर्य, रहस्य, गांभीर्य आदि भावनाओं का अनुभव करता है, वे अकेले उसी के हृदय से संबंध रखने वाले होते हैं।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि उपर्युक्त सभी विषय और भाव मनुष्य मात्र की भावात्मक सत्ता पर प्रभाव डालने वाले होते हैं।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) सही

(3) (A) गलत (R) गलत    (4) (A) सही (R) सही

 

63. स्थापना (Assertion) (A): यह दृष्टिकोण पूर्णतः स्थापित है कि 'एकांकी' नाटक का लघु संस्करण है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि पूर्णकालिक नाटक को काट छाँट कर नाट्यकार्य अथवा नाटकीय संघर्ष का पूर्ण विकास प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) सही

(3) (A) सही (R) सही      (4) (A) गलत (R) गलत

 

64. स्थापना (Assertion) (A): वस्तु में सौन्दर्य एक ऐसी शक्ति या ऐसा धर्म है जो द्रष्टा को आन्दोलित और हिललोलित कर सकता है और द्रष्टा में भी ऐसी शक्ति है, एक ऐसा संवेदन है, जो द्रष्टव्य के सौन्दर्य से चालित और हिल्लोलित होने की योग्यता देता है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि द्रष्टा और द्र॒ष्टव्य में एक ही समानधर्मी तत्व अन्तर्निहित है।

कोड:

(1) (A) सही (R) सही      (2) (A) गलत (R) गलत

(3) (A) गलत (R) सही     (4) (A) सही (R) गलत

 

65. स्थापना (Assertion) (A): नाटक जड़ या रूढ़ नहीं, एक गतिशील पाठ है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि वह लिखा कभी जाए, खेला वर्तमान में जाता है।

कोड:

(1) (A) सही (R) सही      (2) (A) गलत (R) गलत

(3) (A) सही (R) गलत     (4) (A) गलत (R) सही

 

66. स्थापना (Assertion) (A): कविता में चित्रित प्रेम निजी होता है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि प्रेम सामाजिक भाव नहीं है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) सही (R) सही

(3) (A) गलत (R) गलत    (4) (A) गलत (R) सही

 

67. स्थापना (Assertion) (A): चेतना अनुभूति की सघनता और चिन्तन की पराकाष्ठा है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि अनुभूति और चिन्तन का संबंध शुद्ध हृदय के संवेदन से है।

कोड:

(1) (A) सही (R) सही      (2) (A) सही (R) गलत

(3) (A) गलत (R) गलत    (4) (A) गलत (R) सही

 

68. स्थापना (Assertion) (A): श्रद्धा में कारण अनिर्दिष्ट और आलम्बन अज्ञात होता है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि श्रद्धा में दृष्टि व्यक्ति के कर्मों से होती हुई श्रद्धेय तक पहुँचती है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) गलत

(3) (A) गलत (R) सही     (4) (A) सही (R) सही

 

69. स्थापना (Assertion) (A): छायावाद शुद्ध लौकिक प्रेम और सौन्दर्य का काव्य है।

तर्क (Reason) (R): इसीलिए उसमें राष्ट्रबोध और आध्यात्मिक चेतना न के बराबर है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) सही

(3) (A) सही (R) सही      (4) (A) गलत (R) गलत

 

70. स्थापना (Assertion) (A): भक्ति को “सा परानुरक्तिरीश्वरे।' कहा गया है।

तर्क (Reason) (R): इसीलिए भक्त को साध्यस्वरूपा माना गया है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) सही

(3) (A) सही (R) सही      (4) (A) गलत (R) गलत

 

71. स्थापना (Assertion) (A): मानव और प्रकृति के बीच समानता, पूर्व सम्पर्क, पूरकता या विरोध भाव में मिथक सृजन के सूत्र विद्यमान होते हैं।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि प्रकृति में अलौकिकता और दिव्यशक्ति है और मानव कल्पना तथा प्रकृति के मध्य सीधा और अनिवार्य संबंध है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) सही

(3) (A) गलत (R) गलत    (4) (A) सही (R) सही

 

72. स्थापना (Assertion) (A): स्वच्छन्दतावाद छायावाद और रहस्यवाद का पर्याय ही है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि यह द्विवेदी युगीन शास्त्रीयता की प्रतिक्रिया स्वरूप वैयक्तिक कल्पनातिरिक और निजी रहस्यानुभूति का प्रतिफलन है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) सही

(3) (A) सही (R) सही      (4) (A) गलत (R) गलत

 

73. स्थापना (Assertion) (A): अद्वैतवाद आत्मतत्व का विस्तार है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि वह जीव और जगत की पृथक्‌ सत्ता को स्वीकार करता है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) सही

(3) (A) गलत (R) गलत    (4) (A) सही (R) सही

 

74. स्थापना (Assertion) (A): आधुनिकता कोई शाश्वत मूल्य नहीं, वह मूल्यों के परिवर्तन का पर्याय है।

तर्क (Reason) (R): क्योंकि बदलाव की प्रक्रिया में हर युग आधुनिक होता है।

कोड:

(1) (A) सही (R) गलत     (2) (A) गलत (R) सही

(3) (A) सही (R) सही      (4) (A) गलत (R) गलत

 

75. स्थापना (Assertion) (A): देश भक्ति, संस्कृति-राग, चरित्रों की उदात्तता, भाषिक गरिमा और लम्बी कालावधि के विस्तृत कथानक के कारण जयशंकर प्रसाद का चन्द्रगुप्त महाकाव्योचित औदात्य से परिपूर्ण नाटक है।

तर्क (Reason) (R): साथ ही उसमें ब्रेख्त के महानाट्य (एपिक थियेटर) की सम्पूर्ण विशेषताएँ भी मिलती हैं।

कोड:

(1) (A) सही (R) सही      (2) (A) गलत (R) गलत

(3) (A) गलत (R) सही     (4) (A) सही (R) गलत

 

76. निम्नलिखित बोलियों को उनके क्षेत्र के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) खड़ीबोली

(i) बिलासपुर

(b) ब्रजभाषा

(ii) सुल्तानपुर

(c) बांगड़ू

(iii) आगरा

(d) अवधी

(iv) बिजनौर

 

(v) करनाल

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(iii)  

(iv)  

(v) 

(i)

(2)

(iv)  

(iii)  

(v)  

(ii)

(3)

(iv)  

(ii)  

(iii) 

(v)

(4)

(ii)

(iii)

(iv)

(v)

 

77. निम्नलिखित काव्यभाषाओं को उनसे संबद्ध रचनाओं के साथ सुमेलित कीजिए:

                 

सूची- I

सूची- II

(a) अवहट्ट

(i) भंवर गीत

(b) ब्रजभाषा

(ii) प्रिय प्रवास

(c) अवधी

(iii) कीर्तिलता

(d) खड़ीबोली

(iv) प्रबंध चिंतामणि

 

(v) मधुमालती

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(iv)  

(iii)  

(ii) 

(i)

(2)

(i)  

(v)  

(iii)  

(iv)

(3)

(v)  

(iv)  

(ii) 

(iii)

(4)

(iii)

(i)

(v)

(ii)

 

78. निम्नलिखित पंक्तियों को उनके रचयिताओं से सुमेलित कीजिए:

 

सूची- I

सूची- II

(a) नगर बाहिरे डोंबी तोहरि कुड़िया छाइ

(i)  लूहिपा

(b) काआ तरुवर पंच बिड़ाल

(ii) कण्हपा

(c) कड़वा बोल न बोलिस नारि

(iii) खुसरो

(d) मोरा जोबना नवेलरा भयो है गुलाल

(iv) नरपति नाल्‍ह

 

(v) सरहपा

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(ii)  

(i)  

(iv) 

(iii)

(2)

(i)  

(ii)  

(iii)  

(v)

(3)

(iv)  

(iii)  

(ii) 

(i)

(4)

(iii)  

(ii) 

(v) 

(iv)

 

79. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों को उनके रचनाकारों से सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) ओनई घटा, परी जग छाहाँ

(i) सूरदास

(b) आवत जात पनहियाँ टूटी

(ii) कुंभनदास

(c) अति मलीन वृषभानु कुमारी

(iii) तुलसीदास

(d) कोरति भनिति भूतिभल सोई

(iv) जायसी

 

(v) कबीरदास

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(i)  

(iii)  

(iv) 

(v)

(2)

(i)  

(v)  

(iii)  

(iv)

(3)

(ii)  

(v)  

(iv) 

(iii)

(4)

(iv)  

(ii) 

(i) 

(iii)

 

80. निम्नलिखित दार्शनिक सिद्धान्तों को उनसे सम्बद्ध कवियों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) अद्ठैतवाद

(i) जायसी

(b) विशिष्टाद्वेतवाद

(ii) हरिदास

(c) शुद्धाद्वैतवाद

(iii) रैदास

(d) सखी संप्रदाय

(iv) कुंभनदास

 

(v) तुलसीदास

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(iii)  

(v)  

(iv) 

(ii)

(2)

(i)  

(ii)  

(iii)  

(iv)

(3)

(ii)  

(iii)  

(v) 

(i)

(4)

(iv)  

(i) 

(ii) 

(v)

 

81. निम्नलिखित कृतियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) जपुजी

(i) तुलसीदास

(b) रसमंजरी

(ii) कबीर

(c) बरवै नायिका भेद

(iii) नंददास

(d) वैराग्य संदीपनी

(iv) रहीम

 

(v) नानक

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(v)  

(iv)  

(iii) 

(i)

(2)

(i)  

(ii)  

(iii)  

(iv)

(3)

(v)  

(iii)  

(iv) 

(i)

(4)

(iv)  

(v) 

(iii) 

(i)

 

82. निम्नलिखित रचनाओं को उनके प्रतिपाद्य के आधार पर सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) शिवराज भूषण

(i) सर्वांग निरूपण

(b) छत्र प्रकाश

(ii) रीतिस्वच्छंदवृत्ति

(c) बिरहवारीश

(iii) जीवन चरित

(d) काव्य निर्णय

(iv) अलंकार निरूपण

 

(v) रस निरूपण

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(i)  

(v)  

(iii) 

(iv)

(2)

(iv)  

(iii)  

(ii)  

(i)

(3)

(ii)  

(i)  

(iii) 

(iv)

(4)

(ii)  

(iii) 

(v) 

(iv)

 

83. निम्नलिखित रस प्रतिपादक कृतियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) रस सागर

(i) मतिराम

(b) रस चंद्रोदय

(ii) कवीन्द्र

(c) रसराज

(iii) सोमनाथ

(d) रसपीयूष निधि

(iv) भिखारीदास

 

(v) श्रीपति

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(i)  

(ii)  

(iii) 

(iv)

(2)

(ii)  

(iii)  

(v)  

(iv)

(3)

(v)  

(ii)  

(i) 

(iii)

(4)

(iii)  

(iv) 

(ii) 

(i)

 

84. निम्नलिखित काव्य पंक्तियों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) दुःख ही जीवन की कथा रही,

क्या कहूँ आज, जो नहीं कहीं।

(i) अज्ञेय

(b) मैं दिन को ढूँढ रही हूँ

जुगुनू की उजियाली में;

मन माँग रहा है मेरा

सिकता हीरक-प्याली में!

(ii) पंत

(c) रोज-सबेरे मैं थोड़ा-सा अतीत में जी लेता हूँ-

क्योंकि रोज शाम को मैं थोड़ा-सा भविष्य में मर जाता हूँ।

(iii) महादेवी

(d) बिखरी अलकें ज्यों तर्क-जाल

वह विश्व मुकुट-सा उज्ज्वलतम शशिखंड-

सदृश्य था स्पष्ट भाल।

(iv) निराला

 

(v) प्रसाद

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(iv)  

(iii)  

(i) 

(v)

(2)

(v)  

(i)  

(ii)  

(iii)

(3)

(i)  

(ii)  

(iii) 

(iv)

(4)

(ii)  

(iv) 

(v) 

(i)

 

85. निम्नलिखित पात्रों को सम्बद्ध काव्य-कृतियों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) कर्ण

(i) उर्वशी

(b) कमला

(ii) यशोधरा

(c) औशीनरी

(iii) रश्मिरथी

(d) राहुल

(iv) प्रलय की छाया

 

(v) कामायनी

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(i)  

(ii)  

(iii) 

(iv)

(2)

(iv)  

(v)  

(ii)  

(iii)

(3)

(iii)  

(iv)  

(i) 

(ii)

(4)

(ii)  

(iii) 

(v) 

(i)

 

86. निम्नलिखित कवियों को उनकी रचनाओं के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) अज्ञेय

(i) कला और बूढ़ा चाँद

(b) बच्चन

(ii) दीपशिखा

(c) रघुवीर सहाय

(iii) पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ

(d) सुमित्रानंदन पंत

(iv) सतरंगिनी

 

(v) सीढ़ियों पर धूप में

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(i)  

(ii)  

(iii) 

(iv)

(2)

(v)  

(iv)  

(i)  

(ii)

(3)

(iii)  

(iv)  

(v) 

(i)

(4)

(iv)  

(i) 

(ii) 

(iii)

 

87. निम्नलिखित कवियों को उनसे जुड़े आन्दोलनों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) लक्ष्मीकांत वर्मा

(i) नवगीत

(b) नरेश

(ii) प्रगतिवाद

(c) शंभुनाथ सिंह

(iii) प्रयोगवाद

(d) केदारनाथ अग्रवाल

(iv) अकविता

 

(v) नकेनवाद

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(iv)  

(v)  

(i) 

(ii)

(2)

(i)  

(ii)  

(iii)  

(iv)

(3)

(iii)  

(v)  

(iv) 

(i)

(4)

(ii)  

(iii) 

(v) 

(iv)

 

88. निम्नलिखित कहानियों को उनसे संबद्ध पात्रों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) आकाशदीप

(i) सुनन्दा

(b) दिल्ली में एक मौत

(ii) मालती

(c) उसने कहा था

(iii) बुद्धगुप्त

(d) मैंग्रीन

(iv) अतुल

 

(v) बोधासिंह

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(iv)  

(v)  

(i) 

(ii)

(2)

(i)  

(ii)  

(iii)  

(iv)

(3)

(iii)  

(v)  

(iv) 

(i)

(4)

(ii)  

(iii) 

(v) 

(iv)

 

89. निम्नलिखित उपन्यासों को उनके वर्ण्य विषय के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) अजय की डायरी

(i) समकालीन राजनीतिक परिवेश

(b) अन्तराल

(ii) विदेशों में शोषित नारी

(c) बसन्ती

(iii) स्टत्री-पुरुष संबंधों में जटिलता

(d) महाभोज

(iv) विश्वविद्यालय की पृष्ठभूमि

 

(v) महानगरों में बसी गंदी बस्तियों का चित्रण

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(iv)  

(iii)  

(v) 

(i)

(2)

(i)  

(ii)  

(iii)  

(iv)

(3)

(ii)  

(iv)  

(i) 

(iii)

(4)

(iii)  

(v) 

(iv) 

(ii)

 

 

90. निम्नलिखित निबंधों को उनके लेखकों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) कहनी-अनकहनी

(i) शरद जोशी

(b) गंधमादन

(ii) रामधारी सिंह दिनकर

(c) जीप पर सवार इल्लियां

(iii) कुबेरनाथ राय

(d) मिट्टी की ओर

(iv) धर्मवीर भारती

 

(v) हरिशंकर परसाई

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(i)  

(ii)  

(iii)  

(iv)

(2)

(ii)  

(iv)  

(i)  

(v)

(3)

(iv)  

(iii)  

(i) 

(ii)

(4)

(iii)  

(v) 

(iv) 

(i)

 

91. निम्नलिखित स्त्री-पात्रों को संबद्ध नाटकों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) उर्वी

(i) सूर्यमुख

(b) सुन्दरी

(ii) स्कन्दगुप्त

(c) बेनुरती

(iii) देहान्तर

(d) देवसेना

(iv) पहला राजा

 

(v) लहरों के राजहंस

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(i)  

(iii)  

(iv) 

(ii)

(2)

(iv)  

(iii)  

(ii)  

(v)

(3)

(iv)  

(v)  

(i) 

(ii)

(4)

(v)  

(iv) 

(iii) 

(ii)

 

92. निम्नलिखित उपन्यासों को उनसे संबद्ध पात्रों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) सूरज का सातवाँ घोड़ा

(i) रंजना

(b) मैला आंचल

(ii) इला

(c) एक इंच मुस्कान

(iii) विश्वनाथ प्रसाद

(d) तमस

(iv) माणिक मुल्ला

 

(v) नत्थू

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(iv)  

(iii)  

(i) 

(v)

(2)

(i)  

(ii)  

(iii)  

(iv)

(3)

(ii)  

(iv)  

(v) 

(iii)

(4)

(iii)  

(v) 

(iv) 

(ii)

 

93. निम्नलिखित गद्य रचनाओं को उनके लेखकों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) हम-हशमत

(i) अजित कुमार

(b) बच्चन निकट से

(ii) रामवृक्ष वेनीपुरी

(c) माटी को मूरतें

(iii) प्रभाकर माचवे

(d) चीड़ों पर चाची

(iv) कृष्णा सोबती

 

(v) निर्मल वर्मा

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(i)  

(ii)  

(iii) 

(iv)

(2)

(iv)  

(i)  

(ii)  

(v)

(3)

(ii)  

(iii)  

(iv) 

(v)

(4)

(v)  

(iv) 

(i) 

(ii)

 

94. निम्नलिखित काव्यांशों को उनमें निहित अलंकारों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) “रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून

पानी गये न ऊबरे, मोती मानुस चून।”

(i) असंगति

(b) “बंसी धुन सुनि बृज वधू चली बिसार विचार

भुज भूषन पहिरे पगनि भुजन लपेटे हार।”

(ii) रूपक

(c) “जिन दिन देखे वे कुसुम गई सु बीति बहार

अब अलि रही गुलाब की अपत कँटीली डार।”

(iii) श्लेष

(d) “उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बाल पतंग,

बिकसे संत सरोज सब हरषे लोचन भृंग।”

(iv) अन्योक्ति

 

(v) उत्प्रेक्षा

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(iii)  

(i)  

(iv) 

(ii)

(2)

(ii)  

(v)  

(iii)  

(i)

(3)

(i)  

(iii)  

(v) 

(iv)

(4)

(iv)  

(ii) 

(i) 

(iii)

 

95. निम्नलिखित अवधारणाओं को उनसे संबंधित आचार्यों के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची- I

सूची- II

(a) उत्तर-संरचनावाद

(i) लुई अल्थ्युसर (Louis Althusser)

(b) यथार्थवाद

(ii) फ्रेडरिक जेमसन (Fredric Jameson)

(c) स्वच्छंदतावाद

(iii) राबर्ट बर्न्स (Robert Burns)

(d) उत्तर-आधुनिकतावाद

(iv) जार्ज लुकाच (George Lukacs)

 

(v) डी.एच. लॉरैन्स (D.H. Lawrence)

 

कोड:

 

(a)

(b)

(c)

(d)

(1)

(i)  

(iv)  

(iii) 

(ii)

(2)

(ii)  

(i)  

(iv)  

(v)

(3)

(v)  

(iv)  

(ii) 

(i)

(4)

(iii)  

(ii) 

(i) 

(iv)

 

निर्देश: निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उससे सम्बन्धित प्रश्नों (प्रश्न-संख्या 96 से 400) के उत्तर के लिए दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:

सौन्दर्य किसे कहते हैं? प्रकृति, मानव-जीवन तथा ललित कलाओं के आनंददायक गुण का नाम सौन्दर्य है। इस स्थापना पर आपत्ति यह की जाती है कि कला में कुरूप और असुंदर को भी स्थान मिलता है; दुःखांत नाटक देखकर हमें वास्तव में दुःख होता है; साहित्य में वीभत्स का भी चित्रण होता है; उसे सुंदर कैसे कहा जा सकता है? इस आपत्ति का उत्तर यह है कि कला में कुरूप और असुंदर विवादी स्वरों के समान हैं जो राग के रूप को निखारते हैं। वीभत्स का चित्रण देखकर हम उससे प्रेम नहीं करने लगते; हम उस कला से प्रेम करते हैं जो हमें वीभत्स से घृणा करना सिखाती है। वीभत्स से घृणा करना सुंदर कार्य है या असुंदर? जिसे हम कुरूप, असुंदर और वीभत्स कहते हैं, कला में उसकी परिणति सौन्दर्य में होती है। दुःखांत नाटकों में हम दूसरों का दुःख देखकर द्रवित होते हैं। हमारी सहानुभूति अपने तक, अथवा परिवार और मित्रों तक सीमित न रहकर एक व्यापक रूप ले लेती है। मानव-करुणा के इस प्रसार को हम सुंदर कहेंगे या असुंदर? सहानुभूति की इस व्यापकता से हमें प्रसन्न होना चाहिए या अप्रसन्न? दुःखांत नाटकों अथवा करुण रस के साहित्य से हमें दुःख की अनुभूति होती है किंतु यह दुःख अमिश्रित और निरपेक्ष नहीं होता। उस दुःख में वह आनंद निहित होता है जो करुणा के प्रसार से हमें प्राप्त होता है। इसके सिवा इस तरह के साहित्य में हम बहुधा मनुष्य को विषम परिस्थितियों से वीरता पूर्ण संघर्ष करते हुए पाते हैं। संघर्ष का यह उदात्त भाव दुःख की अनुभूति को सीमित कर देता है। वीर मनुष्यों का यह संघर्ष हमें अपनी परिस्थितियों के प्रति सजग करता है, उनकी पराजय भी प्रबुद्ध दर्शकों तथा पाठकों के लिये चुनौती का काम करती है। उनकी बेदना हमारे लिये प्रेरणा बन जाती है। आनंद को इस व्यापक रूप में लें, उसे इन्द्रियजन्य सुख का पर्यायवाची ही न मान लें, तो हमें करुणा और बीभत्स के चित्रण में सौन्दर्य के अभाव की प्रतीति न होगी।

 

96. साहित्य में वीभत्स का भी चित्रण सुंदर होता है, क्योंकि:

(1) वीभत्स को ही काव्यशास्त्र में प्रमुख रस माना गया है।

(2) कला में असुंदर और कुरूप का सौन्दर्य में रूपान्तरण होता है।

(3) कला वीभत्स से घृणा करना नहीं सिखाती।

(4) वीभत्स का चित्रण आकर्षक होता है।

 

97. इनमें से कौन-सा कथन सही है?

(1) वीर मनुष्यों की पराजय आनंद का मूल कारण है।

(2) दुःखांत नाटकों में सहानुभूति के स्वजनों तक सीमित न रहने से मानव-करुणा का प्रसार होता है।

(3) दुःखांत नाटक दूसरों के दुःख से जुड़े होने के कारण हमारे दुःख का कारण नहीं बनते।

(4) प्रबुद्ध दर्शक और पाठक दुःख को एक सीमित भाव मानते हैं।

 

98. इनमें से कौन-सा कथन सही नहीं है ?

(1) वीर मनुष्यों की वेदना सामाजिक के लिए प्रेरणा बन जाती है।

(2) करुण रस के साहित्य में मनुष्य प्राय: विपरीत स्थितियों में संघर्षरत होता है।

(3) संघर्ष का औदात्य दुःख को सीमित करता है।

(4) दुःख में आनंद की अनुपस्थिति होती है।

 

99: दुःखान्त नाटकों में सौन्दर्य की उपस्थिति का आधार क्‍या है ?

(1) उनमें कुरूप और असुंदर को महत्त्व दिया जाता है।

(2) सभी दुःखान्त नाटक प्राय: महान्‌ होते हैं।

(3) दुःखान्त नाटकों में मानव-करुणा का प्रसार होता है।

(4) दुःखान्त नाटकों में नाटककार स्वानुभूति का चित्रण करता है।

 

100. करुण रस के साहित्य में आनंद निहित होता है क्योंकि:

(1) आनंद मात्र इंद्रिय-जन्य सुख है।

(2) साहित्य में करुण रस अपरिहार्य है।

(3) इस साहित्य के मूल में सहानुभूति की व्यापकता है।

(4) साहित्य में दुःख की निरपेक्ष स्थिति है।


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