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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख प्रावधान | New National Education Policy 2020

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य एजुकेशन सिस्टम में व्यापक रूप से बदलाव लाना है। औपचारिक घोषणा केंद्रीय मंत्रियों प्रकाश जावडेकर और डॉ रमेश पोखरियाल निंशक ने संयुक्त रूप से की। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विश्व की सबसे बड़ी परामर्श प्रक्रिया थी।

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इससे पहले, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का मसौदा (ड्राफ्ट) 2019 में ही तैयार कर लिया गया था, वित्त मंत्री निर्मला सीता रमण ने बजट 2020 में शिक्षा नीति की घोषणा भी की थी। जिसकी मंजूरी आज यानि 29 जुलाई 2020 को दी गयी है। नई शिक्षा नीति (New Education Policy) में बेसिक और उच्च शिक्षा के क्षेत्र आमूलचूल परिवर्तन किए गए हैं।

इससे पहले राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थी और 1992 में संशोधित की गई थी। नई शिक्षा नीति की आवश्यकता इसलिए भी महसूस किया जा रहा था क्योंकि पिछली नीति तैयार होने में तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है। इसकी स्वीकृति मिलने के बाद लगभग 34 साल बाद फिर से देश को नई शिक्षा नीति मिली है।

नई एजुकेशन पॉलिसी में कक्षा 5 तक अनिवार्य रूप से और कक्षा 8 तक वैकल्पिक रूप से शिक्षा का माध्यम स्थानीय और मातृभाषा को रखने की सिफ़ारिश की गई है। साथ ही 2030 तक 3 से 18 साल के सभी बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण अनिवार्य शिक्षा करवाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

मानव संसाधन मंत्रालय के नाम में बदलाव

New Education Policy की उद्घोषणा के साथ केंद्र सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया है। मानव संसाधन और विकास मंत्रालय ने ही सिफारिश की थी कि उसका नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) कर दिया जाए, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

आइए नई शिक्षा नीति को समझते हैं

नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई अहम बदलाव किए गए हैं। उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फीसदी GER पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। आइए एक-एक कर सभी प्रावधानों को समझते हैं।

स्कूली शिक्षा में बदलाव

अर्ली चाइल्डहुड केयर एवं एजुकेशन के लिए कैरिकुलम एनसीईआरटी (NCERT, New Delhi) द्वारा तैयार होगा, वही पूरे देश में नोडल एजेंसी होगी। साथ में SSRA (State School Regulatory Authority) बनेगी जिसके चीफ शिक्षा विभाग से जुड़े हुए होंगे।

एजुकेशन पॉलिसी में स्कूली शिक्षा के लिए खास करिकुलर 5+3+3+4 लागू किया गया है। इसके तहत 3-6 साल का बच्चा एक ही तरीके से पढ़ाई करेगा ताकि उसकी फाउंडेशन लिटरेसी और न्यमरेसी को बढ़ाया जा सके। बुनियाद शिक्षा (6 से 9 वर्ष के लिए) के लिए फाउंडेशनल लिट्रेसी एवं न्यूमेरेसी पर नेशनल मिशन शुरु किया जाएगा। इसके बाद मिडिल स्कूल यानी 6-8 कक्षा में सब्जेक्ट का इंट्रोडक्शन कराया जाएगा। इसमें अंतिम 4 वर्ष 9वीं से 12वीं के छात्र शामिल होंगे।

अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान निम्नलिखित हैं-

1. ECCE (Early Childhood Care and Education) के अंतर्गत प्री प्राइमरी शिक्षा आंगनबाड़ी और स्कूलों के माध्यम से दी जाएगी।

2. TET लागू होगा up to सेकंडरी लेवल।

3. स्कूलों में एसएमसी/एसडीएमसी के साथ SCMC यानी स्कूल कॉम्प्लेक्स मैनेजमेंट कमेटी बनाई जाएगी।

4. RTE को कक्षा 12 तक या 18 वर्ष की आयु तक लागू किया जाएगा।

5. त्रिभाषा फॉर्मूला को पहले की तरह जारी रखा गया है।

6. Foreign language course भी स्कूलों में शुरू होंगे।

7. स्थानीय भाषा भी शिक्षा का माध्यम होगी।

8. विज्ञान ओर गणित को बढ़ावा दिया जाएगा, हायर सीनियर सैकंडरी (11th-12th) स्कूल में विज्ञान और गणित विषय अनिवार्य होंगे।

9. नये कौशलों, जैसे- कोडिंग कक्षा 6 से ही बच्चों को सिखाई जाएगी।

10. एक्सट्रा कैरिकुलर एक्टिविटीज को मेन कैरिकुलम में शामिल किया जाएगा।

11. गिफ्टेड चिल्ड्रेन एवं गर्ल चाइल्ड के लिए विशेष प्रावधान किया गया है।

12. कक्षा 6 के बाद से ही वोकेशनल को जोड़ा जाएगा।

13. नई नेशनल क्यूरिकुलम फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा जिसमें ईसीई, स्कूल, टीचर्स और एडल्ट एजुकेशन को जोड़ा जाएगा।

14. केंद्रीय विद्यलयों की तर्ज पर ग्रामीण इलाकों में स्टाफ क्वार्टर बनाए जाएंगे।

15. मिड डे मील के साथ हैल्थी ब्रेकफास्ट भी स्कूलों में दिया जाएगा।

16. शिक्षक नियुक्ति में डेमो/स्किल टेस्ट और इंटरव्यू भी शामिल होंगे।

17. शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से हटाया जाएगा, सिर्फ चुनाव ड्यूटी लगेगी, BLO ड्यूटी से शिक्षक हटेंगे, MDM से भी शिक्षक हटेंगे।

18. नई ट्रांसफर पॉलिसी आयेगी जिसमें ट्रांसफर लगभग बंद हो जाएंगे, ट्रांसफर सिर्फ पदोन्नति पर ही होंगे।

19. स्कूलों में राजनीति व सरकार का हस्तक्षेप अब लगभग समाप्त हो जाएगा।

उच्च शिक्षा में बदलाव

एजुकेशन पॉलिसी में उच्च शिक्षा में अब मल्टीपल इंट्री और एग्जिट का विकल्प दिया गया है। अब कॉलेजों के एक्रेडिटेशन के आधार पर ऑटोनॉमी दी जाएगी और मेंटरिंग के लिए राष्ट्रीय मिशन चलाया जाएगा। अब उच्च शिक्षा के लिए एक ही नियामक संस्था होगी। यूजीसी, एआईसीटीई जैसे संस्थानों को मर्ज कर दिया जाएगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर)।

सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के लिए एक समान शिक्षा मानक होंगे। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) की स्थापना होगी जिससे रिसर्च और इन्नोवेशन को बढ़वा मिलेगा। शिक्षा (टीचिंग, लर्निंग और एसेसमेंट) में तकनीकी को बढ़ावा दिया जाएगा। ई-कोर्सेस आठ प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किये जाएंगे। नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम (एनईटीएफ) की भी स्थापना की जाएगी।

अन्य प्रावधान निम्नलिखित हैं-

रिसर्च में किया गया बदलाव

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह प्रावधान है कि जो छात्र रिसर्च में जाना चाहते हैं, उनके लिए 4 साल का डिग्री प्रोग्राम होगा। जबकि जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं, वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे। लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एम.ए. (M.A.) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद पीएचडी (Ph.D.) कर सकते हैं। इसके लिए अब एमफिल (M.Phil.) की जरूरत भी नहीं होगी। कहने का तात्पर्य अब पाँच साल के इंटीग्रेटेड कोर्स करने वालों को एमफिल (M.Phil.) नहीं करना होगा।

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उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस एग्जाम का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह संस्थानों के लिए अनिवार्य नहीं होगा, यह संस्थाओं की इच्छा पर निर्भर करेगा।

बीएड के कई प्रारूप उपलब्ध

नई शिक्षा नीति में 4 ईयर इंटेग्रेटेड बीएड, 2 ईयर बीएड और 1 ईयर B.Ed. course का प्रावधान किया गया है। अब इण्टर के बाद 4 वर्षीय बीएड, स्नातक के बाद 2 वर्ष बीएड तथा परास्नातक के बाद 1 वर्ष का बीएड कोर्स होगा।

बीच में कॉलेज बदलना हुआ असान

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार अब क्रेडिट बेस्ड सिस्टम होगा जिससे कॉलेज बदलना असान और सरल हो गया है। पढ़ाई के दौरान बीच में कोई भी छात्र अपना विद्यालय बदल सकता है।

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