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NTA UGC NET द्वारा स्थापना और तर्क से संबंधित प्रश्न | UGC NET Hindi Quiz- 69

 यूजीसी नेट हिंदी old question paper

दोस्तों यहाँ पर यूजीसी नेट जेआरएफ हिंदी की परीक्षा के प्रश्नों को दिया जा रहा है। हिंदी क्विज का यह 69वां भाग है। यहाँ पर 2004 से लेकर 2008 तक के ugc net हिंदी के प्रश्नपत्रों में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों को एक साथ दिया जा रहा है। ठीक उसी तरह जैसे हिंदी काव्य एवं गद्य से संबंधित कूट वाले प्रश्न दिए गए हैं।

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UGC NET Hindi Quiz- 69

इन प्रश्नों को हल करने के बाद आप पाएंगे कि nat ugc net hindi में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों से जरूर 5-10 प्रश्न पूछा जाता है। स्थापना और तर्क वाले प्रश्न ugc में लगातार पूछे जाते हैं, यदि इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेंगे तो ज्यादा संभावना है ये प्रश्न गलत न हों और इन्हीं प्रश्नों से मिलता-जुलता प्रश्न पूछ लिया जाए। ugc के अलावा दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभी स्थापना और तर्क वाले प्रश्न पूछे नहीं जा रहे हैं लेकिन वहाँ भी पूछा जा सकता है। इसलिए उन्हें भी इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेना चाहिए।

यूजीसी नेट द्वारा 2004 से 2008 तक पूछे गए प्रश्न

निर्देश: प्रश्न संख्या 1 से 48 तक के प्रश्नों में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A है और दूसरा तर्क (Reason) R है। कोड में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

जून, 2005, II

1. स्थापना (Assertion) A: नाद सौंदर्य से कविता की आयु बढ़ती है।

तर्क (Reason) R: नाद का संबंध छंद से होता है। इसलिए जो लोग छंद की परवाह करते हैं उनकी कविता की आयु अधिक हो जाती है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही है 

(B) A और R दोनों गलत है

(C) A सही और R गलत है

(D) A गलत और R सही है


2. स्थापना (Assertion) A: भाषा एक सामाजिक संपत्ति है।

तर्क (Reason) R: भाषा विहीन समाज की कल्पना संभव नहीं है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही है 

(B) A और R दोनों गलत है

(C) A सही और R गलत है

(D) A गलत और R सही है


3. स्थापना (Assertion) A: आधुनिक हिंदी आलोचना पर पश्चिम के साहित्य-चिंतन का गहरा प्रभाव है।

तर्क (Reason) R: हिंदी के प्रमुख समीक्षक पाश्चात्य साहित्य चिंतन से प्रभावित नहीं है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही है

(B) A और R दोनों गलत है

(C) A सही और R गलत है 

(D) A गलत और R सही है


4. स्थापना (Assertion) A: नयी कविता में छायावाद का प्रभाव एकदम नहीं है।

तर्क (Reason) R: नयी कविता पूर्णतः पश्चिमी प्रभाव में जन्मी है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही है

(B) A और R दोनों गलत है

(C) A सही और R गलत है

(D) A गलत और R सही है 


5. स्थापना (Assertion) A: दलित चेतना की प्रमाणिक अभिव्यक्ति दलित रचनाकारों द्वारा ही हो सकती है।

तर्क (Reason) R: दलित जीवन का वास्तविक अनुभव केवल दलितों को ही होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही है

(B) A और R दोनों गलत है

(C) A सही और R गलत है

(D) A गलत और R सही है 


दिसम्बर, 2005, II

6. स्थापना (Assertion) A: भक्ति कालीन हिंदी कविता लोकमंगल के प्रति समर्पित है।

तर्क (Reason) R: लोकहित भक्त काव्य का मुख्य उद्देश्य है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A गलत और R सही

(D) A और R दोनों गलत


7. स्थापना (Assertion) A: वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान। / उमड़कर आँखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान।

तर्क (Reason) R: कविता की मूल प्रेरणा वेदना है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A और R दोनों सही 


8. स्थापना (Assertion) A: भारतेंदु युगीन हिंदी कविता राष्ट्रीय चेतना से अनुप्राणित है।

तर्क (Reason) R: सभी कवि राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय थे।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A सही R गलत 

(C) R सही A गलत

(D) A और R दोनों गलत


9. स्थापना (Assertion) A: हिंदी के सभी नये कवि अस्तित्ववादी हैं।

तर्क (Reason) R: हिंदी की नई कविता में एक ही भावधारा उपलब्ध है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत 

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों सही

(D) A सही R गलत


10. स्थापना (Assertion) A: नारी चेतना की प्रामाणिक अभिव्यक्ति स्त्री लेखिकाएं ही कर सकती हैं।

तर्क (Reason) R: स्त्री संबंधी सर्जनात्मक लेखन और स्त्री-विमर्श दोनों अलग हैं।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A और R दोनों सही

(C) A गलत और R सही 

(D) A और R दोनों गलत


जून, 2006, II

11. स्थापना (Assertion) A: साहित्य की साधना निरिवल विश्व के साथ एकत्व अनुभव करने की साधना है।

तर्क (Reason) R: साहित्य विश्व बंधुत्व की भावना को पुष्ट करता है।

कोड:

(A) A और R दोनों ग़लत

(B) A सही और R ग़लत

(C) A और R दोनों सही 

(D) R सही और A ग़लत


12. स्थापना (Assertion) A: संत न छांडे संतई, कोटिक मिले असंत

चंदन विष व्यापत नहीं लपटे रहत भुजंग।

तर्क (Reason) R: दुष्टों की संगति में संतो का स्वभाव बदल जाता है।

कोड:

(A) A सही और R ग़लत 

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों ग़लत

(D) A और R दोनों सही


13 स्थापना (Assertion) A: अँग्रेजी पढि के जदपि सद्‌ गुन होत प्रवीन / पै निज भाषा ज्ञान बिन रहत हीन को हीन

तर्क (Reason) R: अँग्रेजी भाषा पढ़कर सभी लोग सम्मानित होते हैं।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A और R दोनों ग़लत

(C) A गलत और R सही

(D) A सही और R ग़लत 


14. स्थापना (Assertion) A: ‘भाषा संस्कृति की संवाहक होती है।’

तर्क (Reason) R: भाषा के बिना संस्कृति की कल्पना संभव नहीं है ।

कोड:

(A) A सही और R ग़लत

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों ग़लत

(D) A और R दोनों सही 


15. स्थापना (Assertion) A: ‘दलित की पीड़ा को दलित लेखक ही आभिव्यक्त कर सकता है।’

तर्क (Reason) R: ‘सहानुभूति, स्वानुभूति के स्तर तक नहीं पहुँच सकती।’

कोड:

(A) A ग़लत और R सही 

(B) A सही और R ग़लत

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों ग़लत


दिसम्बर, 2006, II

16. स्थापना (Assertion) A: मिथक मानव इतिहास को समझने का द्वार है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि ये इतिहास की भांति तथ्यात्मक होते हैं।

कोड:

(A) A ग़लत R सही

(B) A सही R ग़लत 

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


17. स्थापना (Assertion) A: पश्चिम के नए ज्ञानोदय ने बहुस्तरीय वर्चस्ववाद को बढ़ावा दिया।

तर्क (Reason) R: उसी कारण साहित्य में विकेन्द्रीकरण की प्रवृत्ति बढ़ी।

कोड:

(A) A सही R ग़लत

(B) A ग़लत R सही

(C) A और R दोनों सही 

(D) A और R दोनों गलत


18. स्थापना (Assertion) A: रहस्यवाद की कविताओं में सबसे बड़ी आपत्तिजनक दो बातें होती हैं- भावों में सच्चाई का आभाव और व्यंजना की कृतिमता।

तर्क (Reason) R: क्योंकि भावों का संबंध विशुद्ध अध्यात्म से होता है।

कोड:

(A) A सही R ग़लत

(B) A और R दोनों ग़लत

(C) A ग़लत R सही

(D) A और R दोनों सही 

 

19. स्थापना (Assertion) A: साधारणीकरण की अवस्था में सामाजिक या दर्शक भाव मुक्त होकर एकाग्र चित्त से रस का अनुभव करता है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए पश्चिमी नाट्य चिंतक ब्रेक्त ने भी इस बात का समर्थन किया है।

कोड:

(A) A ग़लत R सही

(B) A और R दोनों सही

(C) A और R दोनों ग़लत

(D) A सही R ग़लत 


20. स्थापना (Assertion) A: कला सौंदर्य का विधान करती है।

तर्क (Reason) R: कविता में असुंदर और कुरूप वस्तुओं का वर्णन भी कलात्मक सौंदर्य के अंतर्गत आता है।

कोड:

(A) A और R दोनों ग़लत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A सही R ग़लत

(D) A गलत R सही


21. स्थापना (Assertion) A: श्लिष्ट या अनेकार्थवाची शब्दों के द्वारा अनेक अर्थ के अभिधान में शब्द श्लेष अलंकार होता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि इसमें सार्थक अथवा निरर्थक शब्दों की आवृत्ति होती है।

कोड:

(A) A सही R ग़लत

(B) A ग़लत R सही

(C) A और R दोनों ग़लत

(D) A और R दोनों सही 


22. स्थापना (Assertion) A: ज्यों ज्यों सज़्यता बढ़ती गई त्यों-त्यों मनुष्य की ज्ञानसज़ा बुद्धि व्यवसायात्मक होती गई।

तर्क (Reason) R: ज़्योंकि इसमें भावसज़ा का अभाव है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A सही R ग़लत

(C) A और R दोनों सही 

(D) A ग़लत R सही


जून, 2007, II

23. स्थापना (Assertion) A: मिथक सामूहिक जीवन का संचित अनुभव है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि इसे सामाजिक स्तर पर विश्वास का व्यापक आधार प्राप्त होता है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों सही 

(D) A और R दोनों गलत


24. स्थापना (Assertion) A: उत्तर आधुनिकता के अनुसार तकनीक मनुष्यता की शत्रु है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि इससे मानव की नैसर्गिकता समाप्त हो गई और उसका अपनी प्रकृति से अलगाव हो गया।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A और R दोनों सही 


25. स्थापना (Assertion) A:संसार में मनुष्य जाति के बीच कविता हृदय के भावों को लेकर ही उठी है।’- यह धारणा आज तक चली आ रही है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कविता का संबंध कल्पना से है, यथार्थ से नहीं।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A सही R गलत 

(C) A और R दोनों सही

(D) A गलत R सही


26. स्थापना (Assertion) A: काव्य की आत्मा रस है और गुण रस के धर्म हैं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि गुण रस के उपकारक हैं।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A और R दोनों गलत

(D) A गलत R सही


27. स्थापना (Assertion) A: खण्ड काव्य में जीवन का खण्ड-चित्र प्रस्तुत किया जाता है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए यह चरित काव्य का एक विशेष भेद है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत

(D) A और R दोनों सही 


28. स्थापना (Assertion) A: जिस नायिका के शरीर में नव यौवन का प्रवेश हो रहा हो, उसे मुग्धा नायिका कहते हैं और उसमें लज्जा भाव बड़ा प्रबल होता है।

तर्क (Reason) R: इसी कारण उसे परकीया नायिका की कोटि में गिना जाता है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A गलत R सही

(D) A और R दोनों गलत

(D) A गलत R अंशत: सही


29. स्थापना (Assertion) A: रूपक में कार्यावस्‍था एवं अर्थप्रकृति को मिलाने वाला तत्व संधि है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कथांशों का संबंध एक ओर अर्थप्रकृति से होता है तो दूसरी ओर कार्यावस्‍था से।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत

(C) A और R दोनों गलत

(D) A और R दोनों सही 


दिसम्बर, 2007, II

30. स्थापना (Assertion) A: कविता मनुष्य के हृदय को स्वार्थ-संबंधों के संकुचित दायरे से ऊपर उठाकर लोक-सामान्य-भाव भूमि पर प्रतिष्ठित करती है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कविता संकुचित आत्म और प्रशस्त लोक का समन्वय है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A और R दोनों सही

(C) A सही R गलत 

(D) A गलत R सही


31. स्थापना (Assertion) A: काव्यभाषा को सहज होना चाहिए और उसे वैचित्र्य वक्रता, अलंकार आदि के आडम्बर से मुक्त होना चाहिए।

तर्क (Reason) R: अलंकार, उक्ति वैचित्र्य का प्रयोग श्रेष्ठ कवि ही कर सकते हैं।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A और R दोनों सही

(D) A गलत R सही


32. स्थापना (Assertion) A: मिथक जातीय स्मृति पर आधारित होते हैं।

तर्क (Reason) R: इसीलिए मिथक को विकसनशील माना गया है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत

(D) A और R दोनों सही 


33. स्थापना (Assertion) A: तुलसी के मत में-

‘निर्गुण रूप सुलभ अति, सगुन जान नहिं कोइ।

सुगम अगम नाना चरित, सुनि मुनि-मन भ्रम होई।।’

तर्क (Reason) R: क्योंकि सगुण साकार को उपासना और अनुभव के दायरे में लाना सहज है, जबकि निर्गुण-निराकार की उपासना और अनुभूति नितांत कठिन।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A सही R गलत

(C) A और R दोनों गलत 

(D) A गलत R सही


34. स्थापना (Assertion) A: प्रयोगवाद केवल शिल्प का चमत्कार है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि प्रयोगवादी कविता में कई नए शिल्पगत प्रयोग किए गए।

कोड:

(A) A गलत R सही 

(B) A और R दोनों सही

(C) A सही R गलत

(D) A और R दोनों गलत


35. स्थापना (Assertion) A: अनुभव की प्रामाणिकता दलित और स्त्री-लेखन की मूल शर्त है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि साहित्यकार वर्ग चेतना से प्रतिबद्ध होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R गलत


36. स्थापना (Assertion) A: जैसे विश्व में विश्वात्मा की अभिव्यक्ति होती है वैसे ही नाटक में रस की।

तर्क (Reason) R: क्योंकि प्रेक्षक नाटक में आद्यन्त रस का अनुभव करता है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A और R दोनों गलत

(C) A गलत R सही

(D) A और R दोनों सही 


जून, 2008, II

37. स्थापना (Assertion) A: जैसे वीर कर्म से पृथक वीरत्व कोई पदार्थ नहीं, वैसे ही सुंदर वस्तु से पृथक सौन्दर्य कोई पदार्थ नहीं।

तर्क (Reason) R: सौंदर्य मनोगत नहीं होता, वस्तुगत होता है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A और R दोनों सही

(D) A गलत R सही


38. स्थापना (Assertion) A: नारी का आकर्षण पुरुष को पुरुष बनाता है, और उसका अपकर्षण उसे गौतम बुद्ध बना देता है।

तर्क (Reason) R: गौतम के वैराग्य में यशोधरा के प्रति अपकर्षण नहीं, बल्कि बुद्धत्व प्राप्ति के लिए उनका संकल्प कारणभूत था।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A गलत R सही 

(C) A और R दोनों सही

(D) A सही R गलत


39. स्थापना (Assertion) A: भक्ति और प्रेम दोनों में समर्पण का तत्व समान है।

तर्क (Reason) R: भक्ति और प्रेम स्व के परित्याग से संभव है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही R गलत

(D) A और R दोनों सही 


40. स्थापना (Assertion) A: रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून, / पानी गए न ऊबरै, मोती मानुस चून।

तर्क (Reason) R: धन बल और सत्ता बल के आगे पानीदार मनुष्य भी असमर्थ और निरीह है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A गलत R सही

(D) A और R दोनों गलत


41. स्थापना (Assertion) A: काव्य में भावपक्ष और कलापक्ष दोनों असंपृक्त हैं।

तर्क (Reason) R: रचना में भाषा और संवेदना परस्पर आश्रित हैं।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


42. स्थापना (Assertion) A: प्रेम गली अति साँकरी, तामे है न समाय।

तर्क (Reason) R: प्रेम मनुष्य को सीमित कर देता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A सही R गलत 


43. स्थापना (Assertion) A: जो ज्ञान मानवता को पीस डाले, वह ज्ञान नहीं कोल्हू है।

तर्क (Reason) R: सच्चा ज्ञान मनुष्यता को उन्नत करता है, उसे नष्ट नहीं करता।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A गलत R सही

(D) A और R दोनों गलत


दिसम्बर, 2008, II

44. स्थापना (Assertion) A: मनोविज्ञान के आधार पर व्यक्ति के भाषागत ग्रहण और सम्प्रेषण सामर्थ्य में अंतर स्वाभाविक है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक क्षमता में अंतर नहीं है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A सही R सही

(C) A गलत R सही

(D) A गलत R गलत


45. स्थापना (Assertion) A: नये काव्य में नये जीवन मूल्यों की प्रतिष्ठा और स्वतंत्र प्रयोग की प्रवृत्ति मिलती है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि इसमें जीवन मूल्यों का बिखराव मिलता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत

(D) A और R दोनों गलत


46. स्थापना (Assertion) A: कामायनी का नायक शास्त्रीय महाकाव्यों के नायकों से भिन्‍न है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि उसका अजनवीपन जीवन के प्रति तुच्छता बरतता है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत 

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


47. स्थापना (Assertion) A: बैर क्रोध का अचार या मुरब्बा है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि बैर से दोस्ती बढ़ती है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A और R दोनों सही


48. स्थापना (Assertion) A: काव्य की पूर्ण अनुभूति के लिए कल्पना का व्यापार कवि और श्रोता दोनों के लिए अनिवार्य है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि काव्यानुभूति में वस्तु के साथ वक्ता की मूर्त्त भावना होती है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A और R दोनों सही ✅

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