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NTA UGC NET द्वारा स्थापना और तर्क से संबंधित प्रश्न | UGC NET Hindi Quiz- 71

यूजीसी नेट हिंदी old question paper

दोस्तों यहाँ पर यूजीसी नेट जेआरएफ हिंदी की परीक्षा के प्रश्नों को दिया जा रहा है। हिंदी क्विज का यह 71वां भाग है। यहाँ पर 2012 से लेकर 2013 तक के ugc net हिंदी के प्रश्नपत्रों में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों को एक साथ दिया जा रहा है। ठीक उसी तरह जैसे स्थापना और तर्क से संबंधित क्विज 69 & 70 में दिया गया है।

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UGC NET Hindi Quiz- 71

इन प्रश्नों को हल करने के बाद आप पाएंगे कि nat ugc net hindi में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों से जरूर 10 प्रश्न पूछा जाता है। स्थापना और तर्क वाले प्रश्न ugc में लगातार पूछे जाते हैं, यदि इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेंगे तो ज्यादा संभावना है ये प्रश्न गलत न हों और इन्हीं प्रश्नों से मिलता-जुलता प्रश्न पूछ लिया जाए। ugc के अलावा दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभी स्थापना और तर्क वाले प्रश्न पूछे नहीं जा रहे हैं लेकिन वहाँ भी पूछा जा सकता है। इसलिए उन्हें भी इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेना चाहिए।

यूजीसी नेट द्वारा 2012 से 2013 तक पूछे गए प्रश्न

निर्देश: प्रश्न संख्या 1 से 45 तक के प्रश्नों में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A है और दूसरा तर्क (Reason) R है। कोड में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

जून, 2012, III

1. स्थापना (Assertion) A: बिंब में अर्थ की सम्भाव्यता निहित होती है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि अर्थ हमेशा निश्चित होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत ✅

(D) A और R दोनों गलत


2. स्थापना (Assertion) A: जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कविता में कवि हृदय लोक-सामान्य की भूमि पर पहुँच जाता है।

कोड:

(A) A अंशत: सही R सही

(B) A और R दोनों सही 

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


3. स्थापना (Assertion) A: प्रेमचंद यथार्थवाद से आदर्शवाद को श्रेष्ठ समझते थे।

तर्क (Reason) R: क्योंकि आदर्शवाद उनकी दृष्टि में सम्पूर्ण जीवन-दृष्टि है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A और R दोनों सही

(D) A गलत R सही


4. स्थापना (Assertion) A: कलामात्र के लिए वही साहित्य हो सकता है जो विचारशून्य हो।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कला विचारों से पलायन है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A और R दोनों गलत 

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


5. स्थापना (Assertion) A: कहानी छोटे मुँह बड़ी बात करती है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि कहानी लघुजीवन खण्ड के माध्यम से एक सम्पूर्ण जीवनबोध या सत्य को प्रकाशित करती है।

कोड:

(A) A गलत R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों सही 

(D) A सही R गलत


6. स्थापना (Assertion) A: नाटक केवल चाक्षुष यज्ञ है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि आधुनिक मान्यता है कि नाटक में दृश्य को तुलना में श्रव्य तत्त्व कम महत्वपूर्ण होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सहो

(B) A और R दोनों गलत 

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


7. स्थापना (Assertion) A: साहित्य जनसमूह के हृदय का विकास है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि साहित्य का लक्ष्य केवल मनुष्य का चरित्र निर्माण है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A और R दोनों गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत 


8. स्थापना (Assertion) A: काव्य आत्मा की संकल्पात्मक अनुभूति है। जिसका संबंध

विश्लेषण, विकल्प या विज्ञान से नहीं है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि विज्ञान का संबंध संवेदना से नहीं होता।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


9. स्थापना (Assertion) A: संस्कृति के विकास के लिए मानसिक स्वतंत्रता अनिवार्य है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि संस्कृति एक मानसिक व्यापार है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत

(D) A और R दोनों सही 


10. स्थापना (Assertion) A: स्त्री पैदा नहीं होती बनाई जाती है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि समाज उसे जन्म से वहीं संस्कार प्रदान करता है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A गलत R सही

(D) A और R दोनों गलत


(दिसम्बर, 2012, III)

11. स्थापना (Assertion) A: साहित्य सामूहिक अवचेतन का निषेध है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि साहित्य में सिर्फ व्यक्ति मन की अभिव्यक्ति होती है।

(A) A और R दोनों सही

(B) A और R दोनों गलत 

(C) A सही, R गलत

(D) A गलत, R सही


12. स्थापना (Assertion) A: विषमता और दुख-सुख का द्वंद्व विकास का मूलाधार है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि समता से विकास असंभव है।

कोड:

(A) A सही, R गलत 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A और R दोनों सही

(D) A गलत, R सही


13. स्थापना (Assertion) A: कला सामाजिक अनुपयोगिता की अनुभूति के विरुद्ध अपने को प्रमाणित करने का प्रयत्न है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कलाकार सामाजिक अभावों के खिलाफ संघर्ष करता है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A गलत, R सही

(C) A सही, R गलत

(D) A और R दोनों सही 


14. स्थापना (Assertion) A: सौंदर्य बाहर की कोई वस्तु नहीं, मन के भीतर की वस्तु है।

तर्क (Reason) R: कारण कि सौंदर्य की सत्ता मन के बाहर नहीं होती है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A गलत, R सही

(C) A सही, R गलत 

(D) A और R दोनों सही


15. स्थापना (Assertion) A: नारीवाद का एक उद्देश्य पुरुष-सत्ता का निषेध है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि नारीवाद का एकमात्र उद्देश्य यही है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A गलत, R सही

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


16. स्थापना (Assertion) A: प्रेम न बाड़ी ऊपजै प्रेम न हाट बिकाय।

तर्क (Reason) R: क्योंकि प्रेम दो कौड़ी का होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A और R दोनों सही

(C) A सही, R गलत 

(D) A गलत, R सही


17. स्थापना (Assertion) A: स्थायी साहित्य जीवन की चिरंतन समस्याओं का समाधान है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि स्थायी साहित्य का लोक जीवन की तात्कालिक समस्याओं से कोई संबंध नहीं होता।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही, R गलत 

(D) A गलत, R सही


18. स्थापना (Assertion) A: लोकहृदय में हृदय के लीन होने का नाम रसदशा है।

तर्क (Reason) R: इसलिए साधारणीकरण के लिए कवि का लोकधर्मी होना आवश्यक नहीं है।

कोड:

(A) A सही, R गलत 

(B) A गलत, R सही

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


19. स्थापना (Assertion) A: भारतेंदु युग आधुनिकता का प्रवेशद्वार है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि भारतेंदु युगीन कविता में मध्यकालीन भावबोध का नितांत अभाव है।

कोड:

(A) A सही, R गलत 

(B) A गलत, R सही

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


20. स्थापना (Assertion) A: रस ब्रह्मास्वाद सहोदर है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि रस में लौकिक विषयों का सर्वथा तिरोभाव होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A सही, R गलत 

(C) A और R दोनों गलत

(D) A गलत, R सही


जून, 2013, II

21. स्थापना (Assertion) A: उपमान को अप्रस्तुत विधान मानना हिंदी का प्राचीन सिद्धान्त है।

तर्क (Reason) R: यह स्थापना आचार्य रामचंद्र शुक्ल की है अर्थात्‌ यह नवीन सिद्धान्त है।

कोड:

(A) A सही, R गलत

(B) A गलत, R सही 

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


22. स्थापना (Assertion) A: अस्तित्ववाद विज्ञान विरोधी दर्शन है।

तर्क (Reason) R: यह ‘चयन’ की अगाध छूट देता है और अराजकता, अनास्था तथा अतिस्वछंदता को प्रश्रय देता है। विज्ञान का भी यह अंध समर्थन नहीं करता।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही, R गलत

(D) A गलत, R सही


23. स्थापना (Assertion) A: काव्य का सर्वस्व है ‘काव्यालंकार’। इसके रहते अन्य किसी की आवश्यकता नहीं।

तर्क (Reason) R: काव्यालंकार में ‘रसध्वनि’, ‘रसवदलंकार’ आदि समस्त सम्प्रदायों का स्वत: सन्निवेश हो जाता है। वही सच्चे अर्थों में शोभाकारक धर्म है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A और R दोनों गलत 

(C) A सही, R गलत

(D) A गलत, R सही


24. स्थापना (Assertion) A: बिंब का मुख्य ध्येय होता है, वर्ण्य विषय का ऐन्द्रिय प्रतिबिंबन।

तर्क (Reason) R: बिंब-विधायक रचनाकार ज्ञानेन्द्रियों के माध्यम से अपने भावों का सम्मूर्त्तन करके उनका संप्रेषण करता है और अपने बिंब से पाठक को जोड़ता।

कोड:

(A) A सही, R गलत

(B) A गलत, R सही

(C) A और R दोनों सही 

(D) A और R दोनों गलत


25. स्थापना (Assertion) A: ‘स्वच्छंदवाद’ न छायावाद है, न रहस्यवाद।

तर्क (Reason) R: यह शास्त्रीय जड़ता की प्रतिक्रिया से उत्पन्न वैयक्तिक कल्पनातिरेक और निजी रहस्यानुभूति की उपज है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही, R गलत

(D) A गलत, R सही


दिसम्बर, 2013, II

26. स्थापना (Assertion) A: उत्तर आधुनिकता वृद्ध पूँजीवाद है।

तर्क (Reason) R: इसमें विश्व बाजार से प्रभावित तीसरी दुनिया का उपभोकतावादी चिंतन ज्यादा मुखर हुआ है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A और R दोनों गलत

(C) A और R दोनों सही 

(D) A गलत R सही


27. स्थापना (Assertion) A: अधिकतर मनोवेत्ताओं के मतानुसार बुद्धिवादी पाठक का रचना के साथ पूर्ण तादात्म्य अथवा साधारणीकरण सहज सम्भव नहीं है।

तर्क (Reason) R: आस्वादन के समय पाठक वेदान्तर शून्य हो जाता है, अत: मानसिक अंतराल, के कारण उसका साधारणीकरण हो सकता है।

कोड:

(A) A गलत R सही 

(B) A और R दोनों सही

(C) A सही R गलत

(D) A और R दोनों गलत


28. स्थापना (Assertion) A: वक्रोक्ति स्वतंत्र संप्रदाय न होकर आचार्य कुंतक का एकल मतवाद है।

तर्क (Reason) R: संप्रदाय में एकाधिक विचारकों की सहभागिता अनिवार्य होती है। इसे अधिकतर आचार्यों ने अलंकार माना है, संप्रदाय नहीं।

कोड:

(A) A सही R सही 

(B) A, R दोनों गलत

(C) A सही R गलत

(D) R सही A गलत


29. स्थापना (Assertion) A: रमणीयार्थ प्रतिपादकप्रत्येक शब्दकाव्य नहीं होता।

तर्क (Reason) R: जब सर्वोत्तम शब्द अपने सर्वोत्तम क्रम में किसी वाक्य में सुगठित हो जाता है, तब वह काव्य का स्तर प्राप्त करता है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


30. स्थापना (Assertion) A: प्रतीकवाद एक प्रकार का काव्यात्मक रहस्यवाद है।

तर्क (Reason) R: इसमें केवल रहस्यपूर्ण और वक्रतापूर्ण सृजन किया जाता है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A और R दोनों सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A गलत R सही


(सितंबर, 2013, II)

31. स्थापना (Assertion) A: शाश्वत चेतनता जब श्रेय ज्ञान को मूल चारुत्व में ग्रहण करती है तब काव्य का सृजन होता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि काव्य में सिर्फ श्रेय अपेक्षित है न कि चारुत्व।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत 

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


32. स्थापना (Assertion) A: रस स्थायीभाव से विलक्षण होता है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि रस स्मृति, अनुमान और लौकिक अनुभव से परे होता है।

कोड:

(A) A गलत R गलत

(B) A सही R गलत 

(C) A सही R सही

(D) A गलत R सही


33. स्थापना (Assertion) A: क्षुद्र भावों के विरेचन द्वारा त्रासदी नैतिक प्रभाव उत्पन्न

करती है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि नैतिक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए किसी भाव की जरूरत नहीं है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) गलत R सही

(C) A सही R गलत 

(D) A गलत R गलत


34. स्थापना (Assertion) A: रसात्मक वाक्य ही काव्य है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि हर वाक्य रसात्मक होता है, इसलिए वह काव्य कहलाने के योग्य होता है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R गलत 


35. स्थापना (Assertion) A: ज्ञान राशि के संचित कोश को साहित्य कहते हैं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि साहित्य में हृदय के लिए कोई जगह नहीं है।

कोड:

(A) A गलत R गलत 

(B) A सही R सही

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


(जून, 2013, III)

36. स्थापना (Assertion) A: मानववाद नास्तिक दर्शन है और मानवतावाद आस्तिक दर्शन।

तर्क (Reason) R: मानवतावाद मूलत: निर्गुण-निराकार का प्रतिपादन करता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही R गलत 

(D) R सही A गलत


37. स्थापना (Assertion) A: हिंदी कवि आचार्यों की मौलिक देन है- रसरीति की स्थापना।

तर्क (Reason) R: हिंदी रीतिकाव्य में रस से ज्यादा रीति को महत्त्व दिया गया है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A सही R गलत 

(C) A गलत R सही

(D) A और R दोनों सही


38. स्थापना (Assertion) A: काव्य का सर्वप्रमुख हेतु है: ‘व्युत्पत्ति’।

तर्क (Reason) R:व्युत्पत्ति’ नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा की उपज होती है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत 

(B) A और R दोनों सही

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


39. स्थापना (Assertion) A: काव्य के अपरिहार्य तत्व हैं- शब्द, अर्थ, कल्पना, भाव और विचार।

तर्क (Reason) R: इनमें कई तत्त्व जोड़े या छोड़े जा सकते हैं अत: इनमें अपरिहार्य कोई नहीं है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) R ग़लत A सही 

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


40. स्थापना (Assertion) A: भाषा अर्थ को उन्मीलित करती है, न कि अर्थ की सृष्टि करती है।

तर्क (Reason) R: यह देरिदा का मत है। वह ‘पाठ’ पर जोर देता है, लेखन पर नहीं।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A सही R गलत

(C) A और R दोनों गलत

(D) A गलत R सही


41. स्थापना (Assertion) A: आचार्य शुक्ल के अनुसार ‘लोकमंगल’ के विधायक भाव हैं- करुणा और क्रोध।

तर्क (Reason) R: महर्षि वाल्मीकि के काव्योद्रेक के ये ही दोनों हेतु थे। शुक्ल जी ने क्रोध की जगह प्रेम को रख दिया है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A और R दोनों सही


42. स्थापना (Assertion) A: लय शब्द मात्र में ही नहीं; अर्थ, भाव, विचार- सबमें होती है।

तर्क (Reason) R: शब्द-अर्थ अन्योन्याश्रित होते हैं। शब्द श्रव्य होते हैं और अर्थ बुद्धिग्राह्य। दोनों के अनुपात से ही श्रेष्ठ साहित्य का सृजन होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


43. स्थापना (Assertion) A: ग्लानि से दुबला होने में देर लगती है और पानीदार ही दुबला होता है।

तर्क (Reason) R: दुबला होना आदमी की निर्बलता की निशानी है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत 

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


44. स्थापना (Assertion) A: काव्य का विषय सदा ‘विशेष’ होता है ‘सामान्य’ नहीं। वह ‘व्यक्ति’ सामने लाता है ‘जाति’ नहीं।

तर्क (Reason) R: काव्य की संरचना सदैव ‘जाति’ पर आश्रित होकर ‘व्यक्ति’ केंद्रित हो जाती है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A और R दोनों सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A सही R गलत 


45. स्थापना (Assertion) A: साहसपूर्ण आनंद की उमंग का नाम उत्साह है।

तर्क (Reason) R: साहस के बिना वीरकर्म का संपादन नहीं होता है। अत: आनंद भी प्राप्त नहीं होता।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A सही और R गलत

(C) A और R दोनों सही 

(D) A गलत और R सही

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