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NTA UGC NET द्वारा स्थापना और तर्क से संबंधित प्रश्न | UGC NET Hindi Quiz- 72

यूजीसी नेट हिंदी old question paper

दोस्तों यहाँ पर यूजीसी नेट जेआरएफ हिंदी की परीक्षा के प्रश्नों को दिया जा रहा है। हिंदी क्विज का यह 72वां भाग है। यहाँ पर 2013 से लेकर 2014 तक के ugc net हिंदी के प्रश्नपत्रों में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों को एक साथ दिया जा रहा है। ठीक उसी तरह जैसे स्थापना और तर्क से संबंधित क्विज 69, 70 & 71 में दिया गया है।

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UGC NET Hindi Quiz- 72

इन प्रश्नों को हल करने के बाद आप पाएंगे कि nat ugc net hindi में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों से जरूर 10 प्रश्न पूछा जाता है। स्थापना और तर्क वाले प्रश्न ugc में लगातार पूछे जाते हैं, यदि इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेंगे तो ज्यादा संभावना है ये प्रश्न गलत न हों और इन्हीं प्रश्नों से मिलता-जुलता प्रश्न पूछ लिया जाए। ugc के अलावा दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभी स्थापना और तर्क वाले प्रश्न पूछे नहीं जा रहे हैं लेकिन वहाँ भी पूछा जा सकता है। इसलिए उन्हें भी इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेना चाहिए।

यूजीसी नेट द्वारा 2013 से 2014 तक पूछे गए प्रश्न

निर्देश: प्रश्न संख्या 1 से 40 तक के प्रश्नों में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A है और दूसरा तर्क (Reason) R है। कोड में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

दिसम्बर, 2013, III

1. स्थापना (Assertion) A:ऐब्सर्डबोध’ व्यक्ति के भीतरी यथार्थ को उद्घाटित करता है, अत: यह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

तर्क (Reason) R: यह आस्था और तर्क, दोनों को नकारता है, अत: अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A और R दोनों सही

(C) A गलत और R सही ✅

(D) A और R दोनों गलत


2. स्थापना (Assertion) A: मार्क्सवादी सौंदर्यशास्त्र में सवोपरि है- श्रम का सौंदर्य।

तर्क (Reason) R: मार्क्सवादियों के अनुसार हाथ मात्र कर्म इन्द्रिय न होकर आद्य सर्जना शक्ति है। वही हर कला की सृष्टि करता है। अत: श्रम और सौंदर्य परस्पर पूरक हैं।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों सही 

(D) A और R दोनों गलत


3. स्थापना (Assertion) A: हिंदी काव्यशास्त्र का सर्वोच्च प्रदेय है– ‘सर्वाग निरूपण’।

तर्क (Reason) R: सर्वांग निरूपक आचार्यों ने रस, अलंकार, पिंगल आदि का निरूपण करते हुए इसके अन्तर्गत काव्य हेतु, प्रयोजन, गुण-दोष आदि की भी चर्चा की है, जो अत्यन्त उपयोगी है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


4. स्थापना (Assertion) A: अधिकतर संस्कृत आचार्य औचित्य के पोषक रहे हैं, अत: औचित्य सम्प्रदाय के स्वतंत्र अस्तित्व का औचित्य कदापि सिद्ध नहीं होता है।

तर्क (Reason) R: औचित्य का आग्रह आचार्य भरत से लेकर आनंदवर्धन, महिमभट्ट आदि तक ने बहुश: किया है। सभी काव्यांगों में इसकी स्वीकृति है। आचार्य क्षेमेंद्र ने समग्रतः इस मत को सुव्यवस्थित किया है, किंतु एकल मत होने के कारण इसे सम्प्रदाय कहना समीचीन नहीं लगता।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


5. स्थापना (Assertion) A: प्लेटो के अनुसार भावातिरेक अत्यन्त अनिष्टकर होता है और अरस्तू के अनुसार भावों का दमन बड़ा घातक होता है, अत: आदर्शवाद और त्रासदी दोनों सिद्धान्त सन्दिग्ध हैं।

तर्क (Reason) R: प्लेटो साहित्यकार के निष्कासन पर बल देते थे और अरस्तू मात्र विरेचन तक उसकी उपयोगिता मानते थे, अत: दोनों सिद्धान्त अधूरे लगते हैं।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत

(D) A और R दोनों सही 


6. स्थापना (Assertion) A:उत्तर संरचनावादमुख्यत: पाठ केंद्रित है और वह पाठ अर्थापनसाध्य होता है।

तर्क (Reason) R: पाठ को इतना महत्त्व देना और लेखक की मृत्यु की घोषणा कर देना सस्यूर का अतिवादी चिंतन है, अत: यह पुनविचारणीय है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


7. स्थापना (Assertion) A: काव्यानुभूति सदैव लोकोत्तर होती है।

तर्क (Reason) R: कवि की अनुभूति लोक से परे होती है। इसीलिए उसे ब्रह्मानंद सहोदर कहा गया है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


8. स्थापना (Assertion) A: प्रेम में प्रिय अच्छा लगता है, साथ ही प्रेमी में यह वृत्ति हो जाती है कि मैं भी प्रिय को अच्छा लगूँ।

तर्क (Reason) R: प्रिय और प्रेमी दोनों में परस्पर अनुभूतिजन्य तादात्म्य आधार के रूप में काम करता है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


9. स्थापना (Assertion) A: कविता ही हृदय को प्रकृत दशा में लाती है और जगत के बीच क्रमश: उसका अधिकाधिक प्रसार करती हुई उसे मनुष्यत्व की उच्च भूमि पर ले जाती है।

तर्क (Reason) R: कविता का संबंध हृदय से न होकर मन से और वह विविध शब्दजालों के माध्यम से अभिव्यक्ति पाती है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A और R दोनों गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत 


10. स्थापना (Assertion) A: भाव का ज्ञान से विरोध नहीं है। दोनों में प्रस्थान बिंदु अवश्य भिन्न हैं, पर दोनों का लक्ष्य बिंदु एक ही है।

तर्क (Reason) R: भाव का संबंध हृदय से है और ज्ञान का संबंध बुद्धि से, अत: दोनों एक दूसरे के विरोधी हैं।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A और R दोनों सही

(C) A सही R गलत 

(D) A गलत R सही


(सितम्बर, 2013, III)

11. स्थापना (Assertion) A: रस ही ब्रह्म है। इस रस को पाकर पुरुष आनंदित हो जाता है। यह रस सब को आनंदित करता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि करुण रस की अनुभूति केवल पुरुष को होती है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत 

(C) A और R दोनों गलत

(D) A और R दोनों सही


12. स्थापना (Assertion) A: हिंदी में स्वछंदतावाद की अवधारणा इतनी व्यापक है कि वह सम्पूर्ण छायावादी कविताओं को अपने में समाविष्ट कर लेती है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि छायावादी कविताओं में केवल रोमानियत की अभिव्यक्ति हुई है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत

(D) A और R दोनों गलत 


13. स्थापना (Assertion) A: काव्य का सत्य जीवन की में सौंदर्य के माध्यम द्वारा व्यक्त अखंड सत्य है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि सौंदर्य कलामात्र का सत्य है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A गलत R सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A सही R गलत


14. स्थापना (Assertion) A: क्लासिक साहित्य जीवन की चिरंतन समस्याओं का समाधान है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि जीवन की मूल्य व्यवस्था अपरिवर्तनशील होती है

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A और R दोनों सही

(C) A सही R गलत 

(D) A और R दोनों गलत


15. स्थापना (Assertion) A: नायक की मानसिक अवस्था की अनुकृति नाटक का लक्षण है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि नाटक में नायक के जीवन की कार्यावस्‍थाओं का प्रदर्शन होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A और R दोनों गलत 

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


16. स्थापना (Assertion) A: दुष्कर कर्म करने की भावना ही उत्साह का आलम्बन है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि दुष्कर कर्म का दायरा उत्साह तक सीमित है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A और R दोनों गलत

(C) A और R दोनों सही

(D) A सही R गलत 


17. स्थापना (Assertion) A: कृष्ण काव्य वृत्ति के उत्कर्ष का दर्शन है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कृष्णकाव्य अन्तत: भगवद्‌ आसक्त का समर्थन करता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


18. स्थापना (Assertion) A: अद्वैतवाद अनात्म को भ्रम कहता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि वह प्रकृति की सत्ता को स्वीकार नहीं करता।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A और R दोनों गलत

(C) A और R दोनों सही 

(D) A सही R गलत


19. स्थापना (Assertion) A: आदर्शोन्मुख यथार्थवाद में यथार्थ और आदर्श का समावेश होता है।

तर्क (Reason) R: कारण कि आदर्श का जन्म यथार्थ से होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत 

(D) A और R दोनों गलत


20. स्थापना (Assertion) A: प्रगतिवाद कलाकार की स्वतंत्रता का नहीं, परतंत्रता का शत्रु है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि प्रगतिवाद कलाकार को समाज निरपेक्ष सच्चाई को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता देता है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत 

(C) A और R दोनों गलत

(D) A और R दोनों सही


(जून, 2014, II)

21. स्थापना (Assertion) A: मनुष्य की श्रेष्ठ साधना ही संस्कृति है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि साधनाओं के माध्यम से मनुष्य अविरोधी-सत्य तक पहुँच सका है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R सही 

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R गलत


22. स्थापना (Assertion) A: रस का निर्णायक सहदय है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि सहदय रस का समीक्षक होता है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A गलत R सहो

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R सही


23. स्थापना (Assertion) A: अंतर्मुखी प्रवृत्ति के व्यक्ति की मानसिक उलझनों की सफल अभिव्यक्ति ‘एकालाप’ के रूप में होती है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि ‘एकालाप’ साहित्यकार की मनोरुग्णता का द्योतक है।

कोड:

(A) A गलत R सहो

(B) A सही R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R गलत 


24. स्थापना (Assertion) A: युग जीवन के परिवेश में साहित्य की विकास परम्परा का निरूपण करना ही साहित्य के इतिहासकार का कर्तव्य-कर्म है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि साहित्य का इतिहासकार युग जीवन के परिवेश से इतर होता है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A गलत R सही

(C) A सही R गलत 

(D) A गलत R गलत


25. स्थापना (Assertion) A: साहित्य में वस्तु और रूप एक दूसरे से अभिन्न और परस्पर अनुस्यूत होते हैं।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि साहित्य में वस्तु और रूप की सत्ता एक दूसरे पर निर्भर है।

कोड:

(A) A गलत R गलत

(B) A सही R सही 

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


(दिसम्बर, 2014, II)

26. स्थापना (Assertion) A: काव्य का उत्कर्ष केवल प्रेमभाव की कोमल व्यंजना में ही माना जा सकता है।

तर्क (Reason) R: क्रोध जैसे उग्र एवं प्रचंड भावों के विधान के साथ-साथ करुण-भाव की अभिव्यक्ति से काव्य में पूर्ण सौंदर्य के साक्षात्कार होते हैं।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A गलत, R सही 

(C) A और R दोनों गलत

(D) A सही, R गलत


27. स्थापना (Assertion) A: भूमंडलीकरण ने ‘जन’ की पुरानी धारणा बदल कर रख दी है। उसने ‘जन’ को ‘मास’ में बदल दिया है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि भूमंडलीकरण के ‘मास’ में वही लोग शामिल हैं जिनके पास क्रयशक्ति है और जो जनसंचार साधनों के उपयोग में दक्ष हैं।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A गलत, R सही

(C) A सही, R गलत

(D) A और R दोनों गलत


28. स्थापना (Assertion) A: श्रृंगार को रसराज माना जाता है। इसीलिए वह सभी रसों में प्रधान है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि जीवन के आदि से लेकर अंत तक उसी का प्रसार है और जीवन की सभी भावनाएँ उसी से नि:सृत हैं।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A गलत, R सही

(C) A और R दोनों सही

(D) A सही, R गलत 


29. स्थापना (Assertion) A: भारतेंदु युग आधुनिकता का प्रवेश द्वार है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि वह मध्यकालीन परम्पराओं का पूर्ण विरोधी है।

कोड:

(A) A गलत, R सही

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही, R गलत 

(D) A और R दोनों सही


30. स्थापना (Assertion) A: प्रतीक अमूर्त का मूर्तीकरण है जिसमें अदृश्य सारतत्त्व की अभिव्यक्ति होती है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि जब किसी वस्तु का कोई एक भाग गोचर हो; और फिर आगे उस वस्तु का ज्ञान हो, तब उस भाग को प्रतीक कहते हैं।

कोड:

(A) A गलत, R सही

(B) A और R दोनों सही 

(C) A सही, R गलत

(D) A और R दोनों गलत

 

(जून, 2014, III)

31. स्थापना (Assertion) A: जैसे विश्व में विश्वात्मा को अभिव्यक्ति होती है, वैसे ही नाटक में रस की।

तर्क (Reason) R: क्योंकि नाटक में रस की स्थिति आद्यंत होती है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


32. स्थापना (Assertion) A: छायावाद के संबंध में मान्यता है कि किसी कविता के भावों की छाया यदि कहीं अन्यत्र जाकर पड़े तो उसे छायावादी कविता कहना चाहिए।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि छायावादी कविता अन्योक्ति से अधिक नहीं है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) Aसही R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A और R दोनों सही 


33. स्थापना (Assertion) A: जिस प्रकार आत्मा की मुक्‍तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय को यह मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है। हृदय को इसी मुक्ति की साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द-विधान करती आई है, उसे कविता कहते हैं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कविता मनुष्य की चेतना को अनासक्त बनाती है।

कोड:

(A) A और R दोनों सही

(B) A सही R गलत 

(C) A और R दोनों गलत

(D) A गलत R सही


34. स्थापना (Assertion) A: शास्त्रीय सिद्धांत परिवर्तनशील हैं, उनका युगानुकूल पुनराख्यान होना चाहिए।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि शास्त्रीय सिद्धांतों का युगानुकूल पुनराख्यान न होने से उनका महत्त्व बना रहता है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A सही R गलत 

(C) A गलत R सही

(D) A और R दोनों सही


35. स्थापना (Assertion) A: सर्वभूत को आत्मभूत करके अनुभव करना ही काव्य का चरम लक्ष्य है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि साहित्यकार लोकसत्ता को न स्वीकार करके सिर्फ व्यक्ति सत्ता को स्वीकार करता है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A और R दोनों सही

(C) A सही R गलत 

(D) A और R दोनों गलत


36. स्थापना (Assertion) A: भक्त में लेन-देन का भाव नहीं होता।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि लेन-देन का भाव स्वार्थ की जमीन पर प्रतिष्ठित होता है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत

(C) A और R दोनों गलत

(D) A और R दोनों सही 


37. स्थापना (Assertion) A: जिस साहित्य से हमारी सुरुचि न जागे वह साहित्य कहलाने का अधिकारी नहीं है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि सुरुचि संपन्नता मात्र साहित्य तक ही सीमित है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A और R दोनों गलत

(C) A और R दोनों सही

(D) A गलत R सही


38. स्थापना (Assertion) A: रचना जीवन का अर्थ विस्तार करती है, तो भावक तथा आलोचक रचना का अर्थ विस्तार करता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि रचना में जीवन का संचित अनुभव निहित होता है।

कोड:

(A) A और R दोनों गलत

(B) A और R दोनों सही 

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


39. स्थापना (Assertion) A: विखंडनवाद मार्क्सवाद का विस्थापन नहीं है अपितु उसकी जड़ों तक पहुँचना है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि मार्क्सवाद से विखंडनवाद का जन्म हुआ है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) Aऔर R दोनों सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A सही R गलत 


40. स्थापना (Assertion) A: मिथक मनुष्य जाति के सांस्कृतिक इतिहास का आख्यान है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि मिथक के बिना इतिहास का लेखन असंभव है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A और R दोनों सही

(C) A गलत R सही

(D) A और R दोनों गलत

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