--> NTA UGC NET द्वारा स्थापना और तर्क से संबंधित प्रश्न | UGC NET Hindi Quiz- 74 - हिंदी सारंग
Home प्रश्नपत्र / यूजीसी नेट / hindi quiz / net / nta ugc / Question Paper

NTA UGC NET द्वारा स्थापना और तर्क से संबंधित प्रश्न | UGC NET Hindi Quiz- 74

यूजीसी नेट हिंदी old question paper

दोस्तों यहाँ पर यूजीसी नेट जेआरएफ हिंदी की परीक्षा के प्रश्नों को दिया जा रहा है। हिंदी क्विज का यह 74वां भाग है। यहाँ पर 2016 से लेकर 2017 तक के ugc net हिंदी के प्रश्नपत्रों में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों को एक साथ दिया जा रहा है। ठीक उसी तरह जैसे स्थापना और तर्क से संबंधित क्विज 69 से 73 में दिया गया है।

ugc-net-hindi-old-question-paper-quiz-74
UGC NET Hindi Quiz- 74

इन प्रश्नों को हल करने के बाद आप पाएंगे कि nat ugc net hindi में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों से जरूर 10 प्रश्न पूछा जाता है। स्थापना और तर्क वाले प्रश्न ugc में लगातार पूछे जाते हैं, यदि इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेंगे तो ज्यादा संभावना है ये प्रश्न गलत न हों और इन्हीं प्रश्नों से मिलता-जुलता प्रश्न पूछ लिया जाए। ugc के अलावा दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभी स्थापना और तर्क वाले प्रश्न पूछे नहीं जा रहे हैं लेकिन वहाँ भी पूछा जा सकता है। इसलिए उन्हें भी इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेना चाहिए।

यूजीसी नेट द्वारा 2016 से 2017 तक पूछे गए प्रश्न

निर्देश: प्रश्न संख्या 1 से 40 तक के प्रश्नों में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A है और दूसरा तर्क (Reason) R है। कोड में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

जून. 2016, II

1. स्थापना (Assertion) A: परंपरा आधुनिकता की विरोधी है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि परंपरा पुरातनता को पोषित कर भविष्य का मार्ग अवरुद्ध करती है।

कोड:

(A) A गलत R गलत ✅

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A सही R गलत


2. स्थापना (Assertion) A: मिथक विगत का आलेख है जिसका संबंध केवल धर्म और इतिहास से है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए मिथक का प्रयोजन केवल सामाजिक व्यवस्था के संरक्षण और संचालन से है, रचनात्मक स्वतंत्रता से नहीं।

कोड:

(A) A गलत R गलत 

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A सही R गलत


3. स्थापना (Assertion) A: धर्म और विज्ञान की तरह साहित्य में प्रतीक एक निश्चित अर्थ का प्रतिपादक होता है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए रचनात्मक स्तर पर साहित्यिक प्रतीक के संबंध में पाठक और प्रयोक्‍ता के बीच मतभेद नहीं हो सकता।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत 


4. स्थापना (Assertion) A: काव्य के संदर्भ में ‘काव्यानुभूति’, ‘रसानुभूति’ औरसौंदर्यानुभूति’ का उल्लेख प्राय: समान अर्थ में किया जाता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि सच्ची काव्यानुभूति भावानुभूति से ही सम्पृक्त होती है, जीवन की यथार्थ अनुभूति से नहीं।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A गलत R गलत

(C) A सही R गलत 

(D) A सही R सही


5. स्थापना (Assertion) A: विरुद्धों का सामंजस्य कर्मक्षेत्र का सौंदर्य है जिसकी ओर आकर्षित हुए बिना मनुष्य का हृदय नहीं रह सकता।

तर्क (Reason) R: क्योंकि विरुद्धों का सामंजस्य चमत्कृत करता है और यही लोकधर्म का सौंदर्य है।

कोड:

(A) A गलत R गलत

(B) A सही R सही 

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


दिसम्बर, 2016, II

6. स्थापना (Assertion) A: कविता बाह्य प्रकृति से निरपेक्ष मनृष्य की अंत: प्रकृति का प्रकाशन है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कविता मनुष्य की भावात्मक सत्ता का सृष्टि में विस्तार करती है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A सही और R सही

(C) A गलत और R सही 

(D) A गलत और R गलत


7. स्थापना (Assertion) A: मिथक जातीय जीवन की संयुक्त धरोहर है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए उसका रचनात्मक उपयोग सामाजिक जिम्मेदारी है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A गलत और R गलत

(D) A सही और R सही 


8. स्थापना (Assertion) A: वैचारिक प्रतिबद्धता रचनात्मक व्यक्तित्व की प्राथमिक अनिवार्यता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि साहित्यकार का रचनात्मक विचार सामाजिक परिवर्तन का बीजवपन करता है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही 

(C) A सही और R सही

(D) A गलत और R गलत


9. स्थापना (Assertion) A: चमत्कार वह प्रक्रिया है जिससे चित्त का विस्तार होता है। रसास्वाद और चमत्कार की प्रवृत्ति में कोई अंतर नहीं है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए भारतीय काव्यशास्त्र में काव्य में कई चमत्कार बिन्दुओं का उल्लेख हुआ है।

कोड:

(A) A सही और R सही 

(B) A सही और R गलत

(C) A गलत और R गलत

(D) A गलत और R सही


10. स्थापना (Assertion) A: “अवस्थानुकृति्नाट्यम्‌’ अर्थात्‌ अवस्था की अनुकृति को नाटक कहते हैं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि नाटक में लोक के सुख-दुःख का अनुकरण आंगिक अभिनय द्वारा किया जाता है।

कोड:

(A) A गलत और R गलत

(B) A सही और R सही

(C) A सही और R गलत 

(D) A गलत और R सही


जून, 2016, III

11. स्थापना (Assertion) A: ‘रसौ वै स:।’

तर्क (Reason) R: इसीलिए रस को ब्रह्मास्वाद सहोदर कहा गया है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों सही 

(D) A और R दोनों गलत


12. स्थापना (Assertion) A: छायावाद केवल व्यक्ति के प्रेम, सौंदर्य और यौवन की कविता है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए उसमें सामाजिक नैतिकता की उपेक्षा मिलती है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत 


13. स्थापना (Assertion) A: रहस्य-भावना के लिए द्वैत की स्थिति भी आवश्यक है और अद्वैत का आभास भी।

तर्क (Reason) R: क्योंकि एक के अभाव में विरह की अनुभूति असंभव हो जाती है और दूसरे के बिना मिलन की इच्छा आधार खो देती है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों सही 

(D) A और R दोनों गलत


14. स्थापना (Assertion) A: प्रसाद के अनुसार काव्य मन और आत्मा की संकल्पात्मक अनुभूति है, जिसका संबंध विश्लेषण, विकल्प या विज्ञान से नहीं है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि काव्य आत्मा को मनन-शक्ति को वह असाधारण अवस्था है जो श्रेय सत्य को उसके मूल चारुत्व में सहसा ग्रहण कर युगों की समष्टि अनुभूतियों में अंतर्निहित शाश्वत चेतनता का काव्यमय सृजन करती है। इसीलिए छायावादी काव्य की मूल चेतना रहस्यवादी है।

कोड:

(A) A गलत और R सही 

(B) A और R दोनों सही

(C) A और R दोनों गलत

(D) A सही और R गलत


15. स्थापना (Assertion) A: शुद्ध वियोग का दुख केवल प्रिय के अलग हो जाने की भावना से उत्पन्न क्षोभ या विषाद है जिसमें प्रिय के दुख या कष्ट आदि की कोई भावना नहीं रहती।

तर्क (Reason) R: क्योंकि जिस व्यक्ति से किसी की घनिष्टता और प्रीति होती है वह उसके जीवन के बहुत से व्यापारों तथा मनोवृत्तियों का आधार होता है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही 

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


16. स्थापना (Assertion) A: आद्य बिंब आदिम मनुष्य को ऐंद्रिक कल्पना है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए आगे चलकर कथात्मक तत्त्वों के सम्मिलन से यही आद्य बिंब मिथक के रूप में विकसित हुआ।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों सही 

(D) A और R दोनों गलत


17. स्थापना (Assertion) A: रस व्यापक स्तर पर भारतीय काव्य का महत्त्वपूर्ण तत्त्व है इसीलिए संपूर्ण हिंदी कविता का एकमात्र निकष रस है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि स्वतंत्रता के बाद तक की हिंदी कविता का मूल्यांकन रस की शास्त्रीय पद्धति द्वारा ही संभव है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत 


18. स्थापना (Assertion) A: साहित्य जनता की आभिजात्य चित्तवृत्तियों का प्रतिबिंब है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि साहित्य में अभिव्यक्त भाव और विचार जन सामान्य की धरोहर नहीं होते।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत 


19. स्थापना (Assertion) A: साहित्य लेखक के विशिष्ट व्यक्तित्व का प्रकाशन है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि जनसमूह के पास अपने अनुभवों को व्यक्त करने की कलात्मक सामर्थ्य नहीं होती।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही 

(C) A और R दोनों सही

(D) A और R दोनों गलत


20. स्थापना (Assertion) A: दार्शनिकता और अनुभूति संपन्‍नता से ही व्यक्तित्व का समाजीकरण नहीं हो जाता।

तर्क (Reason) R: क्योंकि व्यक्तित्व के समाजीकरण के लिए अपनी शक्तियों को मानव कल्याण और सामाजिक कार्य की ओर उन्मुख करना होता है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A और R दोनों सही 

(D) A और R दोनों गलत


दिसम्बर, 2016, III

21. स्थापना (Assertion) A: पश्चिमी दृष्टि से सभी कलाओं में गुणों का अनुसंधान ही तो सौंदर्यशास्त्र है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए सौंदर्यानुभव हेतु भारतवर्ष में काव्य को ललितकलाओं के अंतर्गत रखा गया।

कोड:

(A) A सही और R गलत 

(B) A गलत और R सही

(C) A सही और R सही

(D) A गलत और R गलत


22. स्थापना (Assertion) A: काव्य का न्याय, शास्त्र के न्याय (तर्क) से अलग नहीं होता।

तर्क (Reason) R: काव्यार्थ की प्रतीति केवल शास्त्रगत वाच्यार्थ से ही संभव नहीं। इसके लिए काव्य के अपने न्याय का सहारा लेना होगा क्योंकि काव्य न्याय का मूल आधार वक्रोक्ति है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A सही और R सही

(C) A गलत और R गलत

(D) A गलत और R सही 


23. स्थापना (Assertion) A: कवि का दर्शन जीवन के प्रति उसकी आस्था का दूसरा नाम है जो उसकी सर्जनात्मकता को प्रेरित करता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि कवि-कर्म को प्रभावित करने वाला केंद्रीय बिंदु यही आस्था है और आस्था वस्तुत: निर्दिष्ट सत्य की रागात्मक स्वीकृति है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A सही और R सही 

(C) A गलत और R गलत

(D) A गलत और R सही


24. स्थापना (Assertion) A: कविता दो शब्दों के बीच की नीरवता में रहती है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए मौन भी अभिव्यंजना है।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A गलत और R सही

(C) A सही और R सही 

(D) A गलत और R गलत


25. स्थापना (Assertion) A: मनुष्य के लिए कविता इतनी प्रयोजनीय वस्तु है कि संसार की सभ्य-असभ्य सभी जातियों में किसी न किसी रूप में पाई जाती है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि मनुष्यता को समय-समय पर जगाते रहने के लिए कविता मनुष्य के लिए आवश्यक है।

कोड:

(A) A सही और R सही 

(B) A सही और R गलत

(C) A गलत और R सही

(D) A गलत और R गलत


26. स्थापना (Assertion) A: भारतेंदु युग और उसका साहित्य आधुनिकता का प्रवेश द्वार है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए उसके केंद्र में मनुष्य है, ईश्वरीय आस्था लेशमात्र भी नहीं।

कोड:

(A) A सही और R सही

(B) A सही और R गलत 

(C) A गलत और R गलत

(D) A गलत और R सही

उत्तर- (B) A सही और R गलत

 

27. स्थापना (Assertion) A: पश्चिम के ज्ञानोदय से ही भारतीय साहित्य में अस्मिताओं का उदय हुआ।

तर्क (Reason) R: कारण कि भारतीय समाज से कोई विचारप्रेरणा उन्हें नहीं मिली।

कोड:

(A) A गलत और R सही

(B) A सही और R गलत

(C) A सही और R सही

(D) A गलत और R गलत 


28. स्थापना (Assertion) A: युद्ध और प्रेम पारसी थियेटर के दो मूल भाव थे।

तर्क (Reason) R: क्योंकि राष्ट्रप्रेम और जनता में संघर्ष चेतना जागृत करने में पारसी नाटककार आगे थे।

कोड:

(A) A गलत और R गलत

(B) A सही और R सही

(C) A सही और R गलत 

(D) A गलत और R सही


29. स्थापना (Assertion) A: परिवर्तन सृष्टि का अटूट नियम है।

तर्क (Reason) R: लेकिन यह नियम साहित्य पर लागू नहीं होता क्योंकि मनुष्य की संवेदना अपरिवर्तित है।

कोड:

(A) A सही और R गलत 

(B) A सही और R सही

(C) A गलत और R गलत

(D) A गलत और R सही


30. स्थापना (Assertion) A: शब्द का वास्तविक अर्थ वाक्य की गति में ध्वनित होता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि वाक्य में प्रयुक्त होकर शब्द, विषय का सम्मूर्तन करते हैं और नई अर्थ छवियों का उद्घाटन करके अपनी सार्थकता सिद्ध करते हैं।

कोड:

(A) A सही और R गलत

(B) A सही और R सही 

(C) A गलत और R सही

(D) A गलत और R गलत


(जून, 2017, II)

31. स्थापना (Assertion) A: रीतिकाल में जन-साधारण का जीवन सामंती विलासपूर्ण आकांक्षाओं और भोगपूर्ण श्रृंगार से ओतप्रोत था।

तर्क (Reason) R: इसीलिए नैतिकता की दृष्टि से जन-साधारण का आचरण और चरित्र दरबारी संस्कृति से अलग नहीं हो पाया था।

कोड:

(A) A ग़लत R सही

(B) A ग़लत R ग़लत 

(C) A सही R ग़लत

(D) A सही R सही


32. स्थापना (Assertion) A: साहित्य एवं कलाएँ वर्ग-हितों ही का प्रतिबिंबन और प्रतिनिधित्व करती हैं।

तर्क (Reason) R: चूँकि साहित्य की चेतना शासन और सत्ता की विचारधारा से प्रतिबद्ध होती है।

कोड:

(A) A ग़लत R ग़लत 

(B) A ग़लत R सही

(C) A सही R ग़लत

(D) A सही R सही


33. स्थापना (Assertion) A: बिंब अतीन्द्रीय होते हैं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि उनमें ऐन्द्रिकता का होना अनिवार्य है।

कोड:

(A) A सही R ग़लत

(B) A ग़लत R सही 

(C) A सही R सही

(D) A ग़लत R ग़लत


34. स्थापना (Assertion) A: हृदय सहित समाज में उत्पन्न होने वाला हर व्यक्ति सहृदय और सामाजिक होता है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए साहित्यशात्र में उनके लिए किसी गुण अथवा लक्षणों का उल्लेख नहीं किया गया।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A ग़लत R ग़लत 

(C) A ग़लत R सही

(D) A सही R ग़लत


35. स्थापना (Assertion) A: रस कार्य कारणजन्य रूप वस्तु नहीं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि वह तो विभावादि समूहामूलम्बनात्क अनुभव है, न कि विभावादि द्वारा उत्पन्न की गई वस्तु। कारण-ज्ञान और कार्य-ज्ञान का एक समय में होना कदापि सम्भव नहीं।

कोड:

(A) A ग़लत R सही

(B) A सही R ग़लत

(C) A ग़लत R ग़लत

(D) A सही R सही 


नवम्बर, 2017, II

36. स्थापना (Assertion) A: कविता आत्म प्रकाशन है, जो केवल कवि के हृदय को आनंद प्रदान करती है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए कविता को कवि की आत्मा का आलोक माना गया जो समस्त लोक को प्रकाशित करता है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही 

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


37. स्थापना (Assertion) (A): साहित्य समाज के सामूहिक हृदय का विकास है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए समाज में रहने वाले विभिन्न धर्मावलम्बियों की चित्तवृत्ति का इसमें अलग-अलग विकास होता है।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A सही R सही

(C) A गलत R सही

(D) A गलत R गलत


38. स्थापना (Assertion) A: मिथक सार्वकालिक और सार्वदेशिक होते हैं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि सभी देशों की जातीय अस्मिता और विश्वास एक जैसे हैं।

कोड:

(A) A गलत R गलत 

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R सही


39. स्थापना (Assertion) A: रहस्यभावना के लिए द्वैत को स्थिति भी आवश्यक है और अद्वैत का आभास भी।

तर्क (Reason) R: क्योंकि एक के अभाव में विरह की अनुभूति असंभव हो जाती है और दूसरे के बिना मिलन की इच्छा आधार खो देती है।

कोड:

(A) A सही R सही 

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R गलत

(D) A गलत R सही


40. स्थापना (Assertion) A: भारतेंदु युग आधुनिकता का प्रवेश द्वार है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि भारतेंदु युगीन साहित्य में पश्चिमी संस्कृति के संघात से शुद्ध भारतीयता का उदय हुआ।

कोड:

(A) A सही R गलत 

(B) A गलत R गलत

(C) A सही R सही

(D) A गलत R सही

Quiz 1234567891011121314151617181920212223242526, 2728293031323334353637383940414243444546474849505152535455565758596061626364656667686970717273, 74, 75767778798081

यह भी पढ़ें :

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

hindisarang.com पर आपका स्वागत है! जल्द से जल्द आपका जबाब देने की कोशिश रहेगी।

to Top