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NTA UGC NET द्वारा स्थापना और तर्क से संबंधित प्रश्न | UGC NET Hindi Quiz- 75

यूजीसी नेट हिंदी old question paper

दोस्तों यहाँ पर यूजीसी नेट जेआरएफ हिंदी की परीक्षा के प्रश्नों को दिया जा रहा है। हिंदी क्विज का यह 75वां भाग है। यहाँ पर 2017 से लेकर 2018 तक के ugc net हिंदी के प्रश्नपत्रों में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों को एक साथ दिया जा रहा है। ठीक उसी तरह जैसे स्थापना और तर्क से संबंधित क्विज 69 से 74 में दिया गया है।

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UGC NET Hindi Quiz- 75

इन प्रश्नों को हल करने के बाद आप पाएंगे कि nat ugc net hindi में स्थापना और तर्क वाले प्रश्नों से जरूर 10 प्रश्न पूछा जाता है। स्थापना और तर्क वाले प्रश्न ugc में लगातार पूछे जाते हैं, यदि इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेंगे तो ज्यादा संभावना है ये प्रश्न गलत न हों और इन्हीं प्रश्नों से मिलता-जुलता प्रश्न पूछ लिया जाए। ugc के अलावा दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभी स्थापना और तर्क वाले प्रश्न पूछे नहीं जा रहे हैं लेकिन वहाँ भी पूछा जा सकता है। इसलिए उन्हें भी इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेना चाहिए।

यूजीसी नेट द्वारा 2017 से 2018 तक पूछे गए प्रश्न

निर्देश: प्रश्न संख्या 01 से 40 तक के प्रश्नों में दो कथन दिए गए हैं। इनमें से एक स्थापना (Assertion) A है और दूसरा तर्क (Reason) R है। कोड में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

जून, 2017, III

1. स्थापना (Assertion) A: जहाँ व्यक्ति जीवन का लोक जीवन में लय हो जाता है, वही भाव की पवित्र भूमि है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए कविता में विश्व हृदय का यह आभास कविता की यथार्थवादी अवस्था है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A गलत R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


2. स्थापना (Assertion) A: काव्य का आनंद लोकोत्तर और अनिर्वचनीय होता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि रस को ब्रह्मानंद का समानार्थी कहा गया है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A गलत R गलत


3. स्थापना (Assertion) A: रस ज्ञान द्वारा ग्राह्य होता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि हृदय की अनुभूति के साथ उसकी बौद्धिक सत्ता भी होती है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R सही


4. स्थापना (Assertion) A: छायावादोत्तर कविता विचार-प्रधान काव्य है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि उसमें कवि के निजी संवेदनानुभवों को अभिव्यक्त होने का अवसर नहीं मिला।

कोड:

(A) A गलत R गलत

(B) A  सही R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R सही


5. स्थापना (Assertion) A: कला माध्यम के द्वारा कलाकार सत्य को सुंदर बनाकर निजत्व की उपलब्धि करता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि सत्य कलाकार की संचित पूँजी होती है, सौंदर्य-सृजन उसका व्यापार और लोकमंगल का प्रसार उसकी उपलब्धि।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A गलत R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


6. स्थापना (Assertion) A: काव्य-सौंदर्य भाव और कला की एकान्विति में है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि काव्य में भाव पक्ष और कला पक्ष दोनों असम्बद्ध होते हैं।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R सही


7. स्थापना (Assertion) A: मिथक मनुष्य के आदिम मस्तिष्क की सृजनशील शक्तियों का मूल्यवान सांस्कृतिक उपहार है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि आदिम मन और मस्तिष्क द्वारा प्रकृति के तत्त्वों और घटनाओं के मानवीकरण की अचेतन प्रक्रिया ही मिथक रचना का मूल बनी।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A गलत R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R गलत


8. स्थापना (Assertion) A: कविता में श्रृंगार-चित्रण अनिवार्य है।

तर्क (Reason) R: क्‍योंकि श्रृंगार की सरस वाग्धारा ही पाठक को आनंदित कर सकती है, अन्य भावधारा नहीं।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


9. स्थापना (Assertion) A: कविता एक अलौकिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए जीवन का लौकिक-पक्ष उसमें नहीं आ सकता।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A गलत R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R गलत


10. स्थापना (Assertion) A: छायावादी काव्य आत्मनिष्ठता के कारण अहंवादी बन गया।

तर्क (Reason) R: इसी कारण छायावादी कवियों ने सामाजिक नैतिकताओं की उपेक्षा की।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R गलत


(नवम्बर, 2017, III)

11. स्थापना (Assertion) A: काव्य हृदय का परम उत्थान है और विज्ञान मस्तिष्क का चरम उत्कर्ष है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि विज्ञान हृदय को शान्ति तो नहीं दे पाता लेकिन काव्य का उत्कर्ष जीवन की सभी बढ़ती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।

कोड:

(A) A गलत R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A सही R गलत


12. स्थापना (Assertion) A: लोक आख्यान की निर्मिति सामूहिक अचेतन की प्रक्रिया है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि लोक में इसके निर्माण की प्रक्रिया अनवरत चलती रहती है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A सही R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A गलत R सही


13. स्थापना (Assertion) A: जयशंकर प्रसाद के नाटकों में रस और द्वन्द्द का समन्वय है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि उनके नाटकों की संरचना पश्चिमी और आत्मा भारतीय है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R सही

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R गलत


14. स्थापना (Assertion) A: कलाकार सत्य को सुन्दर बनाकर शिवत्व की उपलब्धि करता है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए सृजन व्यापार कलाकार का आत्मकल्याण है, लोकमंगल नहीं।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A गलत R गलत

(C) A सही R गलत

(D) A सही R सही


15. स्थापना (Assertion) A: भूमंडलीकरण विश्व की पूँजीवादी सांस्कृतिक व्यवस्था है, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्‌’ नहीं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि पूँजीवादी व्यवस्था ने स्थानीय संस्कृति को सम्पूर्णत: नष्ट कर दिया है और अब पूरा विश्व ही एक परिवार है।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


16. स्थापना (Assertion) A: पश्चिम के नए ज्ञानोदय ने बहुस्तरीय वर्चस्ववाद का निषेध किया।

तर्क (Reason) R: इसी कारण साहित्यिक चेतना में न केवल विखण्डन समाप्त हुआ, बल्कि ऐकात्मकता को बढ़ावा मिला।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A गलत R गलत


17. स्थापना (Assertion) A: सांस्कृतिक एकरूपता साहित्य के लोकतंत्र में अनिवार्य है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि बहुलतावाद साहित्यिक संवेदना को खण्डित करता है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R गलत

(D) A गलत R सही


18. स्थापना (Assertion) A: हिंदी अभिव्यक्ति की एक सम्पूर्ण और सशक्त सर्वसमावेशी बहुलतावादी सांस्कृतिक इकाई है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि भारत के एक बड़े भूभाग की बोलियों का समूह इसकी शक्ति को बढ़ाता है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R सही


19. स्थापना (Assertion) A: जैसे वीरकर्म से पृथक्‌ वीरत्व कोई पदार्थ नहीं, वैसे ही सुन्दर वस्तु से पृथक्‌ सौन्दर्य कोई पदार्थ नहीं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि सौंदर्य बाहर की कोई वस्तु नहीं है, मन के भीतर की वस्तु है। जो भीतर है वही बाहर है।

कोड:

(A) A गलत R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A सही R गलत


20. स्थापना (Assertion) A: मनुष्य की श्रेष्ठ साधनाएँ ही संस्कृति है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि इन्हीं साधनाओं के माध्यम से मनुष्य अविरोधी सत्य तक पहुँच सका है। संस्कृति इसी अविरोधी सत्य का पर्याय है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R गलत

(D) A गलत R सही


जून, 2018, II

21. स्थापना (Assertion) A: जिस प्रकार हमारी आँखों के सामने आए हुए कुछ रूप व्यापार हमें रसात्मक भावों में मग्न करते हैं उसी प्रकार भूतकाल में प्रत्यक्ष की हुई कुछ परोक्ष वस्तुओं का वास्तविक स्मरण भी कभी-कभी रसात्मक होता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि तब हमारी मनोवृत्ति स्वार्थ या शरीर यात्रा के रूखे विधानों से हटकर शुद्ध भावक्षेत्र में स्थित हो जाती है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A गलत R गलत


22. स्थापना (Assertion) A: साहित्य का इतिहास वस्तुतः मनुष्य-जीवन के अखंड प्रवाह का इतिहास है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि मनुष्य ही साहित्य का अन्तिम लक्ष्य है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A सही R सही

(C) A गलत R सही

(D) A गलत R गलत


23. स्थापना (Assertion) A: भूमंडलीकरण विश्व की पूँजीवादी व्यवस्था है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि इसमें पूरा विश्व एक बाज़ार है और व्यक्ति उपभोक्ता।

कोड:

(A) A गलत R सही

(B) A सही R गलत

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


24: स्थापना (Assertion) A: दलित साहित्य का वैचारिक आधार मार्क्सवाद है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि इसमें वर्ग-संघर्ष की हिमायत की गई है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A गलत R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


25. स्थापना (Assertion) A: अस्तित्ववाद सामाजिक कल्याण और सह अस्तित्व का दर्शन है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि यह व्यक्ति की स्वतन्त्रता और चयन की आजादी का पक्षधर है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


26. स्थापना (Assertion) A: वासना या संस्कार वंशानुक्रम से चली आती हुई दीर्घ भाव परम्परा का मनुष्य जाति की अन्त: प्रकृति में निहित संचय नहीं है।

तर्क (Reason) R: इसी कारण भारतीय आचार्यों की यह मान्यता पश्चिम की मनोविश्लेषणवादी सामूहिक अवचेतन की अवधारणा से पुष्ट है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R गलत

(D) A गलत R सही


27. स्थापना (Assertion) A: किसी काव्य का श्रोता या पाठक जिन विषयों को मन में लाकर रति, करुणा, क्रोध, उत्साह इत्यादि भावों तथा सौन्दर्य, रहस्य, गांभीर्य आदि भावनाओं का अनुभव करता है, वे अकेले उसी के हृदय से संबंध रखने वाले होते हैं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि उपर्युक्त सभी विषय और भाव मनुष्य मात्र की भावात्मक सत्ता पर प्रभाव डालने वाले होते हैं।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R सही


28. स्थापना (Assertion) A: यह दृष्टिकोण पूर्णतः स्थापित है कि 'एकांकी' नाटक का लघु संस्करण है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि पूर्णकालिक नाटक को काट छाँट कर नाट्यकार्य अथवा नाटकीय संघर्ष का पूर्ण विकास प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


29. स्थापना (Assertion) A: वस्तु में सौन्दर्य एक ऐसी शक्ति या ऐसा धर्म है जो द्रष्टा को आन्दोलित और हिललोलित कर सकता है और द्रष्टा में भी ऐसी शक्ति है, एक ऐसा संवेदन है, जो द्रष्टव्य के सौन्दर्य से चालित और हिल्लोलित होने की योग्यता देता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि द्रष्टा और द्र॒ष्टव्य में एक ही समानधर्मी तत्व अन्तर्निहित है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A गलत R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत


30. स्थापना (Assertion) A: नाटक जड़ या रूढ़ नहीं, एक गतिशील पाठ है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि वह लिखा कभी जाए, खेला वर्तमान में जाता है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A गलत R गलत

(C) A सही R गलत

(D) A गलत R सही


31. स्थापना (Assertion) A: कविता में चित्रित प्रेम निजी होता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि प्रेम सामाजिक भाव नहीं है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A सही R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A गलत R सही


32. स्थापना (Assertion) A: चेतना अनुभूति की सघनता और चिन्तन की पराकाष्ठा है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि अनुभूति और चिन्तन का संबंध शुद्ध हृदय के संवेदन से है।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A सही R गलत

(C) A गलत R गलत

(D) A गलत R सही


33. स्थापना (Assertion) A: श्रद्धा में कारण अनिर्दिष्ट और आलम्बन अज्ञात होता है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि श्रद्धा में दृष्टि व्यक्ति के कर्मों से होती हुई श्रद्धेय तक पहुँचती है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R सही


34. स्थापना (Assertion) A: छायावाद शुद्ध लौकिक प्रेम और सौन्दर्य का काव्य है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए उसमें राष्ट्रबोध और आध्यात्मिक चेतना न के बराबर है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


35. स्थापना (Assertion) A: भक्ति को ‘सा परानुरक्तिरीश्वरे।’ कहा गया है।

तर्क (Reason) R: इसीलिए भक्त को साध्यस्वरूपा माना गया है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


36. स्थापना (Assertion) A: मानव और प्रकृति के बीच समानता, पूर्व सम्पर्क, पूरकता या विरोध भाव में मिथक सृजन के सूत्र विद्यमान होते हैं।

तर्क (Reason) R: क्योंकि प्रकृति में अलौकिकता और दिव्यशक्ति है और मानव कल्पना तथा प्रकृति के मध्य सीधा और अनिवार्य संबंध है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R सही


37. स्थापना (Assertion) A: स्वच्छन्दतावाद छायावाद और रहस्यवाद का पर्याय ही है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि यह द्विवेदी युगीन शास्त्रीयता की प्रतिक्रिया स्वरूप वैयक्तिक कल्पनातिरिक और निजी रहस्यानुभूति का प्रतिफलन है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


38. स्थापना (Assertion) A: अद्वैतवाद आत्मतत्व का विस्तार है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि वह जीव और जगत की पृथक्‌ सत्ता को स्वीकार करता है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A गलत R गलत

(D) A सही R सही


39. स्थापना (Assertion) A: आधुनिकता कोई शाश्वत मूल्य नहीं, वह मूल्यों के परिवर्तन का पर्याय है।

तर्क (Reason) R: क्योंकि बदलाव की प्रक्रिया में हर युग आधुनिक होता है।

कोड:

(A) A सही R गलत

(B) A गलत R सही

(C) A सही R सही

(D) A गलत R गलत


40. स्थापना (Assertion) A: देश भक्ति, संस्कृति-राग, चरित्रों की उदात्तता, भाषिक गरिमा और लम्बी कालावधि के विस्तृत कथानक के कारण जयशंकर प्रसाद का चन्द्रगुप्त महाकाव्योचित औदात्य से परिपूर्ण नाटक है।

तर्क (Reason) R: साथ ही उसमें ब्रेख्त के महानाट्य (एपिक थियेटर) की सम्पूर्ण विशेषताएँ भी मिलती हैं।

कोड:

(A) A सही R सही

(B) A गलत R गलत

(C) A गलत R सही

(D) A सही R गलत

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