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NTA UGC NET द्वारा अनुच्छेद पर आधारित पूछे गए प्रश्न | UGC NET Hindi Quiz- 78

यूजीसी नेट हिंदी old question paper

दोस्तों यहाँ पर यूजीसी नेट जेआरएफ हिंदी की परीक्षा के प्रश्नों को दिया जा रहा है। हिंदी क्विज का यह 78वां भाग है। यहाँ पर 2008 से लेकर 2010 तक के ugc net हिंदी के प्रश्नपत्रों में अनुच्छेद वाले प्रश्नों को एक साथ दिया जा रहा है। ठीक उसी तरह जैसे अनुच्छेद से संबंधित क्विज 77 में दिया गया है।

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UGC NET Hindi Quiz- 78

इन प्रश्नों को हल करने के बाद आप पाएंगे कि nat ugc net hindi में अनुच्छेद वाले प्रश्नों से जरूर 5 प्रश्न पूछा जाता है। अनुच्छेद वाले प्रश्न ugc में लगातार पूछे जाते रहे हैं, यदि इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेंगे तो ज्यादा संभावना है ये प्रश्न गलत न हों। ugc के अलावा दूसरी कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अनुच्छेद वाले प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए उन्हें भी इन प्रश्नों का अभ्यास कर लेना चाहिए।

यूजीसी नेट द्वारा 2008 से 2010 तक पूछे गए प्रश्न

निर्देश: निम्नलिखित गद्य अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे संबंधित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 1 से 5 तक) के उत्तरों के दिए गए बहु विकल्पों में से सही विकल्प का चुनाव करें। (जून, 2008, II)

लोक में फैली दुख की छाया को हटाने में ब्रह्म की आनंदकला, जो शक्तिमय रूप धारण करती है, उसकी भीषणता में भी अद्भुत मनोहरता, कटुता में भी अपूर्व मधुरता, प्रचंडता में भी गहरी आर्द्रता साथ लगी रहती है। विरुद्धों का यही सामंजस्य कर्मक्षेत्र का सौंदर्य है, जिसकी ओर आकर्षित हुए बिना मनुष्य का हृदय नहीं रह सकता। इस सामंजस्य का और कई रूपों में भी दर्शन होता है। किसी कोट, पतलून, हैट वाले को धाराप्रवाह संस्कृत बोलते अथवा किसी पंडित वेशधारी सज्जन को अंग्रेज़ी में प्रगल्भ वक्‍तृता देते सुन व्यक्तित्व का जो एक चमत्कार-सा दिखाई पड़ता है, उसकी तह में भी सामंजस्य का यही सौंदर्य समझना चाहिए। भीषणता और सरसता, कोमलता और कठोरता, कटुता और मधुरता, प्रचंडता और मृदुता का सामंजस्य ही लोकधर्म का सौंदर्य है। आदि कवि वाल्मीकि की वाणी इसी सौंदर्य के उद्घाटन महोत्सव का दिव्य संगीत है। सौंदर्य का यह उद्घाटन असौंदर्य का आवरण हटाकर होता है। धर्म और मंगल की यह ज्योति अधर्म और अमंगल की घटा को फाड़ती हुई फूटती है। इससे कवि हमारे सामने असौंदर्य, अमंगल, अत्याचार, क्लेश इत्यादि भी रखता है; रोष, हाहाकार और ध्वंस का दृश्य भी लाता है। पर सारे भाव, सारे रूप और सारे व्यापार भीतर-भीतर आनंदकला के विकास में ही योग देते पाए जाते हैं। यदि किसी ओर उन्मुख ज्वलंत रोष है, तो उसके और सब ओर करुण दृष्टि फैली दिखाई पड़ती है। यदि किसी ओर ध्वंस और हाहाकार है, तो और सब ओर उसका सहगामी रक्षा और कल्याण है। व्यास ने भी अपने “जयकाव्य” में अधर्म के पराभव और धर्म की जय का सौंदर्य प्रत्यक्ष किया।


1. कर्मक्षेत्र का सौंदर्य किसमें है?

(A) अन्याय के प्रति रोष दिखाने में

(B) लोगों के प्रति मृदुता के व्यवहार में

(C) विरोधी भावों के सामंजस्य में

(D) उपर्युक्त तीनों सही हैं।


2. सूटधारी के संस्कृत बोलने पर क्या प्रतिक्रिया मन में उठती है?

(A) सामंजस्य की कमी दिखाई देती है

(B) उसका अज्ञान प्रकट होता है

(C) उसका संस्कृत प्रेम मन को छू जाता है

(D) उसके संस्कृत उच्चारण पर हँसी आती है


3. विध्वंस और अत्याचार के सहगामी भाव क्या हो सकते हैं?

(A) भ्रष्टाचार और क्लेश

(B) रक्षा और मंगल का भाव

(C) अदभुत मनोहरता का भाव

(D) सौंदर्य का दिव्य संगीत


4. ‘आनंदकला के विकास’ से लेखक का क्‍या तात्पर्य है?

(A) जीवन में सरसता और कोमलता पैदा करना

(B) अधर्म को अधर्म से काटना

(C) अन्याय के प्रति रोष प्रकट करना

(D) सारे भाव, रूप और व्यापारों में उचित सामंजस्य


5. इस गद्य अवतरण के लिए उपयुक्त शीर्षक क्‍या है?

(A) विरोधों के सामंजस्य का सौंदर्य

(B) सौंदर्य का उद्घाटन

(C) व्यास की काव्य कला

(D) व्यक्तित्व का चमत्कार


निर्देश: निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़े और उससे संबंधित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 6 से 10 तक) के उत्तरों के दिये गये बहुविकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें। (दिसम्बर, 2008, II)

साहित्य तो एक सात्विक जीवन है। उसे कठिन तपस्या और महान यज्ञ समझना चाहिए। जहाँ व्यक्ति के व्यक्तित्व के कोई स्वतंत्र विषय नहीं रह जाते, उच्च साहित्य की वह भाव-भूमि है। वहाँ अपरिग्रह का साम्राज्य है, फोटो नहीं छापे जाते। वहाँ वाणी मौन रहती है ‘गाथा’ गाने में सुख नहीं मानती। उस उच्च स्तर से जितने क्रिया कलाप होते हैं, आत्म प्रेरणा से होते हैं, पर आज दिन हिंदी में आत्म-प्रेरणा और ‘आत्मकथा’ का नाम लेना पाखण्ड बढ़ाना है। हमारे देश में आत्मकथा लिखने की परिपाटी नहीं रही।


6. साहित्य को क्या माना गया है?

(A) कठिन साधना और तपस्या

(B) लेखन का महान यज्ञ

(C) कठिन तपस्या और महान यज्ञ

(D) लेखन तपस्या और कठिन साधना


7. उच्च साहित्य की भावभूमि क्‍या है?

(A) जहाँ व्यक्ति स्वतंत्र विषय नहीं चुन सकता

(B) जहाँ लेखक के व्यक्तित्व की स्वतंत्रता नहीं रहती

(C) जहाँ व्यक्ति को लिखने की स्वतंत्रता नहीं रहती

(D) जहाँ व्यक्तित्व के कोई स्वतंत्र विषय नहीं रह जाते


8. उच्च स्तर के क्रियाकलाप किससे होते हैं?

(A) आत्मानुभव से

(B) आत्म प्रेरणा से

(C) आत्म कथन से

(D) आत्मावलोकन से


9. किस देश में आत्मकथा लिखने की परिपाटी नहीं रही?

(A) भारतवर्ष में

(B) उत्तर प्रदेश में

(C) रूस में

(D) अमेरिका में


10. हिंदी में किस विधा को पाखण्ड कहा गया है?

(A) गाथा को

(B) आत्मप्रेरित संस्मरण को

(C) आत्मकथा को

(D) गाथा को


निर्देश: निम्नलिखित अवतरणों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे संबंधित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 11 से 15 तक) के उत्तरों को दिए गए बहुविकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें। (जून, 2009, II)

महाकाव्य की रचना जातीय संस्कृति के किसी महाप्रवाह, सभ्यता के उद्गम, संगम, प्रलय, किसी महच्चरित्र के विराट उत्कर्ष अथवा आत्मतत्व के किसी चिर अनुभव रहस्य को प्रदर्शित करने के लिए की जाती है। आर्य-सभ्यता के विकास-काल में जब देव-दानवों का (अथार्त देव और आसुर संस्कृतियों का) संघर्ष हो रहा था, तब महर्षि वाल्मीकि ने देव पक्ष का विजयघोष करनेवाले रामायण महाकाव्य का निर्माण किया। वेदव्यास ने द्वापर के अंत में कुरुक्षेत्र संग्राम का स्मारक महाभारत ग्रंथ रखा, जो कलियुग का अग्रदूत, अत्यंत दुखांत सृजन है। 


11. महाकाव्य की रचना किसको प्रदर्शित करने के लिए की जाती है?

(A) किसी महच्चरित्र के आत्मतत्व को

(B) किसी महत्‌ विषय को

(C) किसी महान नायक को

(D) किसी महच्चरित्र के विराट उत्कर्ष को


12. आर्य सभ्यता के विकास काल में किनके मध्य संघर्ष हो रहा था?

(A) दैव और आसुर संस्कृतियों के मध्य

(B) आर्य और अनार्यों के मध्य

(C) देशी और विदेशियों के मध्य

(D) सत और असत प्रवृत्तियों के मध्य


13. महाभारत किस युग के अंत में लिखा गया:

(A) त्रेता युग के अंत में

(B) द्वापर के अंत में

(C) भक्तिकाल के अंत में

(D) आदिकाल के अंत में


14. महाभारत को कैसा सृजन कहा गया है:

(A) सुखांत सृजन

(B) प्रसादांत सृजन

(C) दुखांत सृजन

(D) सुखांत दुखांत सृजन


15. महाकाव्य की रचना में क्या होना चाहिए:

(A) राष्ट्रीय चेतना का महाप्रवाह

(B) जातीय संस्कृति का महाप्रवाह

(C) सांस्कृतिक सामाजिक चेतना

(D) मानवीय चेतना


निर्देश: निम्नलिखित गद्य अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे संबंधित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 16 से 20 तक) के उत्तरों के लिए दिये गये बहु विकल्पों में से सही विकल्प का चुनाव करें। (दिसम्बर, 2009, II)

आधुनिक मानव की चिंतन-प्रक्रिया पर भी विज्ञान ने गहरा प्रभाव डाला है। आस्था और श्रद्धा के स्थान पर तर्क और बुद्धि की प्रतिष्ठा से ही परम्परागत मूल्यों पर प्रश्न-चिह्न लगा है। किंतु इस तथ्य का एक दूसरा पहलू भी है। वैज्ञानिक चिंतन ने देश की जो दूरियाँ कम कर दी हैं, उससे मानव-मानव में अंतर घटा है जिससे कई पुराने मूल्यों को ही नए आयाम मिले हैं। जो सहयोग छोटे-से ग्राम या समाज तक सीमित था, अब विश्वव्यापी बनता जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीयतावाद पर अधिक बल दिया जाने लगा है। युद्ध पहले से अधिक गहिंत ठहराया जाने लगा है। समता भी अधिक महत्त्वपूर्ण मूल्य हो गया है। इसलिए यह कहना तो उचित नहीं जान पड़ता कि नये मूल्यों का विकास नहीं हुआ, किंतु संप्रति इतना अवश्य है कि कोई नया मूल्य इतना व्यापक नहीं हो सका कि पूरी मूल्य-व्यवस्था दे सके। अधिकांश नवीनता पुरातन के संशोधन में ही रही है।


16. विज्ञान ने हमारी चिंतन-प्रक्रिया पर किस प्रकार प्रभाव डाला है?

(A) हम अपने परम्परागत मूल्यों को तर्क और बुद्धि की कसौटी पर परखने लगे हैं

(B) हमारा विश्वास सभी परम्परागत मूल्यों से उठ गया है

(C) हमारी सोच शुद्ध भौतिकवादी बन गई है

(D) हम पूर्णतः आत्मकेंद्रित हो गये हैं


17. वैज्ञानिक चिंतन से क्या परिवर्तन हुआ है?

(A) हमें अधिक भौतिक लाभ मिलने लगे हैं

(B) हमारी भौतिक दूरियाँ सिमट जाने से विश्वमानवता की परिकल्पना साकार हुई है, फलस्वरूप अंतरराष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ है

(C) अब हम अपने ग्राम से ही नहीं चिपटे रहना चाहते अपितु विश्व भ्रमण करना चाहते हैं

(D) विश्व के भौतिक सुखों के प्रति अधिक आकृष्ट हुए हैं


18. विज्ञान ने किन नये मूल्यों के निर्माण में सहयोग दिया है?

(A) विज्ञान ने भौतिक सुख-सुविधाओं को महत्त्वपूर्ण बना दिया है

(B) रंगभेद व नस्लवाद को बढ़ावा दिया है

(C) मनुष्य को आत्मकेंद्रित बना दिया है

(D) मनुष्य-मनुष्य के बीच सभी प्रकार के भेद-भाव मिटाकर समता के धरातल पर ला खड़ा किया है


19. क्या आज के सभी मूल्य नव-निर्मित ही हैं?

(A) आज सभी मूल्यों के नव-निर्माण में ही हम विश्वास करते हैं

(B) आज मूल्य ही महत्त्वहीन हो गये हैं

(C) नहीं, अधिकांश पुरातन मूल्य ही संशोधित रूप में आ रहे हैं

(D) हम पुरातन मूल्यों को बदलना नहीं चाहते हैं


20. उपर्युक्त गद्य अवतरण का उपयुक्त शीर्षक दें।

(A) विज्ञान का महत्त्व

(B) मूल्य चिंतन

(C) पुरातन मूल्यों का महत्त्व

(D) अंतरराष्ट्रीयता की परिकल्पना


निर्देश: निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे संबंधित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 21 से 25 तक) के उत्तरों के दिए गए बहुविकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें: (जून, 2010, II)

भाषा पर कबीर का जबरदस्त अधिकार था। वे वाणी के डिक्टेटर थे। जिस बात को उन्होंने जिस रूप में प्रकट करना चाहा है उसे उसी रूप में भाषा से कहलवा लिया– बन गया है तो सीधे-सीधे, नहीं तो दरेरा देकर। भाषा कुछ कबीर के सामने लाचार-सी नजर आती है। उसमें मानों ऐसी हिम्मत ही नहीं है कि इस लापरवाह फक्‍कड़ की किसी फरमाइश को नाहीं कर सके। और अकह कहानी को रूप देकर मनोग्राही बना देने की तो जैसी ताकत कबीर की भाषा में है वैसी बहुत कम लेखकों में पाई जाती है।


21. कबीर को वाणी के विषय में क्या कहा गया है?

(A) कबीर वाणी के महापंडित थे

(B) कबीर वाणी के धनी थे

(C) कबीर वाणी के डिक्टेटर थे

(D) कबीर वाणी के लोकनायक थे


22. कबीर के सामने भाषा का रूप कैसा था?

(A) भाषा का परिष्कृत रूप सामने आता है

(B) भाषा लाचार-सी नजर आती है

(C) भाषा पर उनका नियंत्रण नहीं है

(D) भाषा में बिखराव दृष्टिगत होता है


23. कबीर की भाषा में कैसी हिम्मत नहीं है?

(A) कि वह आशय को व्यक्त न कर सके

(B) कि वह इस फक्कड़ को फरमाइश को नाहीं कर सके

(C) कि वह कबीर के काव्यानुरूप प्रयुक्त न हो

(D) कि वह सहज, सरल और सरस न बन सके


24. कबीर को भाषा में कैसी ताकत थी?

(A) असत्य को सत्य सिद्ध कर दे

(B) अकह कहानी को मनोग्राही बना दे

(C) दुरूह दर्शन को भी स्पष्ट कर दे

(D) सहज को भी असहज बना दे


25. कबीर ने बात को किस रूप में प्रकट करना चाहा?

(A) उसे उसी रूप में भाषा से कहलवा लिया

(B) उसी रूप में भाषा से प्रकट नहीं कर सकते थे

(C) परोक्ष रूप में व्यक्त कर देते थे

(D) अधिक दुरूह बना देते थे


निर्देश: निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उससे संबंधित प्रश्नों (प्रश्न संख्या 26 से 30) के उत्तरों के दिए गये बहुविकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें: (दिसम्बर, 2010, II)

जिन कर्मों में किसी प्रकार का कष्ट या हानि सहने का साहस अपेक्षित होता है उन सबके प्रति उत्कंठापूर्ण आनंद उत्साह के अंतर्गत लिया जाता है। कष्ट या हानि के भेद के अनुसार उत्साह के भी भेद हो जाते हैं। साहित्य-मीमांसकों ने इसी दृष्टि से युद्धवीर, दानवीर, दयावीर इत्यादि भेद किये हैं। इनमें सबसे प्राचीन और प्रधान युद्धवीरता है, जिसमें आघात, पीड़ा या मृत्यु की परवा नहीं रहती। इस प्रकार की वीरता का प्रयोजन अत्यन्त प्राचीन काल से पड़ता चला आ रहा है, जिसमें साहस और प्रयत्न दोनों चरम उत्कर्ष पर पहुँचते हैं। पर केवल कष्ट या पीड़ा सहन करने के साहस में हो उत्साह का स्वरूप स्फुरित नहीं होता। उसके साथ आनंदपूर्ण प्रयत्न या उसकी उत्कंठा का योग चाहिए।


26. उत्साह के भेद किस आधार पर किये गये हैं?

(A) दुर्बलता के आधार पर

(B) उत्साह के आधार पर

(C) कष्ट या हानि के भेद के आधार पर

(D) पीड़ा या आघात के आधार पर


27. उत्कंठापूर्ण आनंद किसके अंतर्गत लिया जाता है?

(A) वीरता के अंतर्गत

(B) उत्साह के अंतर्गत

(C) युद्ध के अंतर्गत

(D) दान के अंतर्गत


28. साहित्य-मीमांसकों ने वीरता के कौन-कौन से भेद किये हैं?

(A) युद्धवीर, दानवीर और दयावीर

(B) कर्मवीर और धर्मवीर

(C) शूरवीर और परिश्रमी

(D) अध्यवसायी और ईमानदार


29. सबसे प्राचीन कौन-सी वीरता है?

(A) दानवीरता

(B) दयावीरता

(C) वाकवीरता

(D) युद्धवीरता


30. युद्धवीरता के लिए किस प्रकार की प्रवृत्ति अपेक्षित है?

(A) चंचलता और अस्थिरता

(B) चतुराई और भीरुता

(C) साहस, प्रयत्न और कष्ट सहने का धीरज

(D) दुष्टता और धृष्टता

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